शिक्षा और रोजगार या आरक्षण ?


आरक्षण के लिये योगेंद्र यादव ने सरकार को ठहराया दोषी, उनका कहना है कि "हमारे देश में 2 बुनियादी चीज काम नहीं करती हैं. वो चूंकि काम नहीं करती हैं, इसलिए सारा का सारा बोझ इस आरक्षण पर आ जाता है. पहली बात हमारी स्कूल की शिक्षा व्यवस्था काम नहीं करती, बच्चों को ठीक शिक्षा नहीं मिलती. दूसरी, हमारी जो रोजगार की व्यवस्था है, रोजगार मिलता नहीं है. इन दोनों के न होने से सबको लगता है कि हर समस्या का हल अब आरक्षण से निकलेगा I"


सरकार ने कैसे बनाया 8 लाख की इनकम का पैमाना?



10 फीसदी आरक्षण में 8 लाख सालाना इनकम वाले परिवारों पर भी सवाल उठ रहे हैं. कहा जा रहा है कि इस इनकम तक के परिवारों को आरक्षण के दायरे में रखा जाएगा. योगेंद्र यादव इसे मजाक बताते हैं, जिससे एक भी सवर्ण का फायदा नहीं होने वाला.


"8 लाख की लिमिट का क्या मतलब है? इसका मतलब है कि तकरीबन देश के 98 फीसदी लोग इसमें शामिल हो जाएंगे. जो 51% में से कम से कम 20 से 30% नौकरियां उन लोगों को जा रही है, जो जनरल कैटेगरी के हैं या उनकी इनकम 8 लाख से नीचे है. जिसे पहले से ही 20% मिल रहा है, उसे 10% आरक्षण से क्या फायदा होगा?"


राजनीतिक विश्लेषक योगेंद्र यादव अंत में ये भी कहते हैं कि देशभर में 24 लाख नौकरियों के पद खाली हैं. वे कहते हैं कि सरकार उसे नहीं भर रही है, नाटक कर रही है, जिसे सब देख भी रहे हैं. वो इसे राजनीति का पाखंड बता रहे हैं.



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