कोरोना की दूसरी लहर अब गांवों की तरफ

 


 इस समय एक तरफ दुनिया के ज्यादातर देश कोरोना संक्रमण का सामना कर रहे हैं। इन सबके बीच अमेरिकी लोगों के लिए अच्छी खबर है। जो लोग वैक्सीनेशन करा चुके हैं अब उन्हें मास्क पहनना या सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन जरूरी नहीं है। अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल ऐंड प्रीवेंशन (सीडीसी) ने कही है। बता दें कि लोगों का मास्क पहनना अनिवार्य था। अमेरिका कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में से एक है। सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल ऐंड प्रीवेंशन ने बताया है कि कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज ले चुके लोग बिना मास्क और सोशल डिस्टेंस यानी 6 फीट की दूरी के नियम को फॉलो किए बिना अपने क्रियाकलापों को शुरू कर सकते हैं। लेकिन राज्य, स्थानीय, आदिवासी या क्षेत्रीय कानूनों, लोकल बिजनेस और वर्कप्लेस पर गाइडलाइंस के मुताबिक जिन जगहों पर मास्क पहनने की बाध्यता है  वहां मास्क पहनना अनिवार्य रहेगा।  अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन ने कहा कि अगर आप पूरी तरह से वैक्सीनेट हो गए तो हैं आपको अब मास्क पहनने की जरूरत नहीं है। लेकिन इसके साथ यह भी कहा कि एक साल की कड़ी मेहनत और इतनी कुर्बानी के बाद अब यह रूल एकदम सिंपल है।  या तो वैक्सीन लगवाएं या फिर हमेशा मास्क पहनते रहें।

बिहार ने 25 मई तक लॉकडाउन बढ़ाया। महाराष्ट्र में भी एक जून तक पाबंदियां लागू। देश में पिछले 24 घंटे में आए हैं तीन लाख 62 हज़ार से ज़्यादा नए मामले। वहीं, पीएम नरेंद्र मोदी 18 और 20 मई को उन 100 ज़िलों के डीएम के साथ बैठक करेंगे, जहां हैं कोविड के अधिक केस। झारखंड में 27 मई तक बढ़ा लॉकडाउन। 16 मई से और सख्त होंगी पाबंदियां। 

सरकार ने कोविशील्ड की दोनों डोज के बीच के अंतराल को 6-8 सप्ताह से बढ़ाकर 12-16 सप्ताह कर दिया है। स्वास्थय मंत्रालय ने जानकारी दी कि डॉ. एन के अरोड़ा के नेतृत्व में कोविड कार्य समूह ने कोविशील्ड टीके की पहली खुराक और दूसरी खुराक के बीच के अंतर को 6-8 सप्ताह से बढ़ाकर 12-16 सप्ताह करने की सिफारिश की है।

ऐसे में जब राज्य कोरोना वायरस के टीकों की कमी से जूझ रहे हैं, केंद्र ने बृहस्पतिवार को कहा कि अगस्त से दिसंबर के बीच पांच महीनों में देश में 216 करोड़ से अधिक खुराक उपलब्ध कराई जाएंगी, जो पूरी आबादी का टीकाकरण करने के लिए पर्याप्त हैं। केंद्र ने यह भी कहा कि रूस का कोविड-19 रोधी टीका स्पुतनिक V अगले सप्ताह तक उपलब्ध होने की संभावना है।

कोविड-19 टीकाकरण को लेकर केन्द्रीय मंत्री हरदीप पुरी और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर के बीच वाक युद्ध छिड़ गया है। एक ओर जहां पुरी का आरोप है कि कांग्रेस नेता टीका लगवाने को लेकर लोगों के मन में संदेह पैदा कर रहे हैं वहीं थरूर ने पलटवार करते हुए कहा कि केन्द्र सरकार विपक्ष पर उंगली उठाने के बजाए नीति की विफलता की जिम्मेदारी कब लेगी।


इजरायल और फलस्तीन के बीच जारी टकराव भीषण रूप लेता जा रहा है। दोनों देशों के बीच पिछले सोमवार से जारी हमलों में अब तक गाजा में 65 लोगों और इजरायल में 7 के मारे जाने की खबर है। ईद के दिन बम धमाकों के बीच खुली गाजा के लोगों की नींद, भीषण रूप ले रहा इजरायल-फलस्तीन का टकराव.

G-7 सम्मेलन में डिजिटल तरीके से हिस्सा ले सकते हैं PM मोदी, जॉनसन ने किया था आमंत्रित

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोविड-19 के अधिक मामलों वाले 46 जिलों के जिलाधिकारियों के साथ 18 मई को संवाद करेंगे, उसके बाद 54 के साथ 20 मई को संवाद करेंगे। PM मोदी, बैठक में मुख्यमंत्री भी रहेंगे मौजूद.

पीएम नरेंद्र मोदी  प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 8वीं किस्त जारी करने जा रहे हैं। इस मौके पर शुक्रवार को पीएम किसान स्कीम के लाभार्थियों के साथ बातचीत भी करेंगे।

कोरोना वायरस से लड़ने के लिए मास्क सबसे कारगर चीज बताई गई है। कोविड 19 के खिलाफ मास्क का उपयोग सबसे ज्यादा जरूरी बताया गया है। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान विशेषज्ञों ने कहा कि लोग घरों में भी मास्क में रहें और बाहर 2-2 मास्क का उपयोग करें।

कोरोना महामारी के दौर में सिविल सर्विसेज प्री एग्जाम 2021 को टाल दिया गया है। यह परीक्षा 27 जून 2021 को होनी थी। लेकिन अब इसे 10 अक्टूबर 2021 को कराया जाएगा।

भारत बायोटेक की कोवैक्सीन को बच्चों पर दूसरे/तीसरे चरण के ट्रायल को मंजूरी मिल गई है। डीसीजीआई के इस फैसले को बेहद अहम बताया जा रहा है। आयुवर्ग के लिए कोवैक्सीन के सेकेंड-थर्ड फेज ट्रायल की मंजूरी.

कोरोना से उबरने के बाद भी लोग अलग तरह की परेशानी का जिक्र कर रहे हैं। एक ताजा शोध के मुताबिक पुरुषों के जननांगों में कोरोना वायरस घर बना रहे हैं और उसकी वजह से पुरुष इरेक्टाइल डिस्फंक्शन का सामना कर रहे हैं।

केंद्र सरकार के सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट पर विवाद के बीच छत्तीसगढ़ सरकार ने नवा रायपुर में राजभवन और सीएम आवास के निर्माण का काम रोका। सारे टेंडर कैंसल। दूसरी ओर, सुप्रीम कोर्ट का निर्देश- एनसीआर में प्रवासी मजदूरों के लिए चलाई जाए सार्वजनिक रसोई।

पूर्व भारतीय क्रिकेटर रमेश पवार बने महिला क्रिकेट टीम के कोच। इससे पहले भी पवार यह भूमिका निभा चुके हैं। उनके अंडर में ही टीम 2018 के टी-20 विश्व कप में सेमीफाइनल तक पहुंची थी। सीनियर खिलाड़ी मिताली राज को टीम में नहीं लेने पर हुए विवाद के बाद पवार को हटना पड़ा था।

अमरोहा ज़िले के बछरायूं कस्बे में बने सीएचसी  की बंद पड़ी इमारत को तुरंत झाड़-पोंछ कर साफ किया गया और वहाँ 30 बिस्तर लगाए गए. जिलाधिकारी उमेश मिश्रा अपनी टीम के साथ ऑक्सीजन कंसंट्रेटर लेकर पहुंचे और हेल्थ स्टाफ को तुरंत मरीजों को भर्ती करने का निर्देश दिया. ग्रामीण क्षेत्र में स्थित इस सीएचसी की नई बनी इमारत बिना इस्तेमाल के ही पुरानी हो रही थी. अब महामारी के दौर में जिला प्रशासन ने रूरल हेल्थ नेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए आपात स्थिति में इसे चालू किया है. प्रशासन यहां 70 बेड और लगाने जा रहा है. कोरोना की दूसरी लहर अब गांवों की तरफ बढ़ गई है. उत्तर प्रदेश में हुए पंचायत चुनावों ने संक्रमण को और बढ़ाने का काम किया है. ऐसे में प्रशासन के सामने ग्रामीण क्षेत्रों में संक्रमण रोकने और यहां स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की मुश्किल चुनौती है. इस मुश्किल वक्त में उत्तर प्रदेश सरकार ने बीते साल लाई गई अपनी 'ट्रेस, टेस्ट, ट्रैक एंड ट्रीट' की नीति को फिर से लागू किया गया है. इसके अंतर्गत स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांव-गांव पहुंचकर लक्षण वाले लोगों का टेस्ट करती हैं और जरूरत पड़ने पर उन्हें अस्पतालों में भर्ती कराती हैं. दरअसल, पिछले साल यूपी सरकार ने गांव-गांव में संक्रमण का पता लगाने के लिए नर्सिंग स्टाफ़ और मेडिकल स्टाफ़ की टीमें बनाईं थीं. गांव के लोगों को भी इसमें शामिल गिया गया था. इन्हें ही निगरानी समिति कहा गया था. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने हाल ही में अपनी एक रिपोर्ट में इन निगरानी समितियों के कारगर होने का जिक्र किया है.

       उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव नवनीत सहगल के मुताबिक़ इन टीमों को फिर से एक्टीवेट कर दिया गया है और 5 मई के बाद से ये गांव-गांव पहुंच कर संक्रमण की स्थिति का जायजा ले रही हैं. नवनीत सहगल कहते हैं, "उत्तर प्रदेश में 97 हज़ार से अधिक रेवेन्यू विलेज हैं जहां सर्विलेंस समितियां बनाई गई थीं. ये सेटअप हमारे पास पहले से था. पहली लहर के दौरान कोरोना संक्रमण अधिकतर शहरों तक सीमित था. तब भी हमने गांवों में निगरानी की थी लेकिन घर-घर निगरानी का अभियान बहुत आक्रामकता से नहीं चलाया था." सहगल कहते हैं, "पिछली बार प्रवासी भी एक साथ ही लौटे थे तो उन्हें बाहर आइसोलेट रखा गया था. लेकिन इस बार अलग-अलग समय पर लोग गांवों की तरफ लौटे हैं जिससे संक्रमण का ख़तरा और बढ़ गया है इसलिए इस बार घर-घर पहुंचकर जांच करने का अभियान अधिक आक्रामकता के साथ चलाया जा रहा है." निगरानी समिति में एक नर्स और गांव की एक आशा वर्कर होती है. इस टीम को ऑक्सीमीटर और थर्मल स्कैनर दिए गए हैं. ये गांवों में घर-घर पहुंचकर लोगों के स्वास्थ्य की स्थिति का जायजा लेती हैं और किसी में लक्षण दिखाई देने पर इसकी सूचना स्वास्थ्य विभाग को देती हैं. नवनीत सहगल के मुताबिक लक्षण वाले लोगों के घर पर ही टेस्ट करने के लिए प्रदेश में पांच हज़ार रैपिड रिस्पॉन्स टीमें (आरआरटी) बनाई गई हैं जिनके पास एंटीजन टेस्ट की किट होती है. ज़रूरत पड़ने पर ये आरटीपीसीआर टेस्ट भी करते हैं. नवनीत सहगल दावा करते हैं कि इन टीमों ने बुधवार तक यूपी में तीस लाख 31 हज़ार 274 घरों तक पहुंच कर लोगों के स्वास्थ्य की स्थिति का जायजा लिया है. सहगल के मुताबिक़, इस अभियान के दौरान निगरानी टीमों को चार लाख चौबीस हज़ार लक्षणयुक्त लोग मिले हैं. जिनमें किसी को खांसी थी, किसी को बुखार था. जिन लोगों में अधिक लक्षण दिखाई दे रहे थे उनमें एक लाख 81 हज़ार से अधिक एंटीजन टेस्ट किए गए जिनमें 5262 लोग पॉजिटिव पाए गए. उत्तर प्रदेश सरकार ने ज़िला स्तर पर मेडिकल किटें बनाई हैं जिसमें पैरासिटामॉल और एरिथ्रोमाइसिन जैसी दवाएं हैं.  उमेश मिश्रा कहते हैं, "गांव-गांव में मेडिकल किट बंटवाने में जनप्रतिनिधियों का सहयोग भी लिया जा रहा है. कुछ स्वयंसेवी संगठन अपने स्तर पर ये किटें तैयार करके भी बांट रहे हैं. हमारा मकसद है कि बीमार व्यक्ति को तुरंत मेडिकल सहायता मिले. जिन लोगों को अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत है उनके लिए बेड तैयार किए जा रहे हैं. हमने ग्रामीण क्षेत्र में कई जगह तीस-तीस बेड के अस्पताल तैयार किए हैं. इसमें स्थानीय स्तर पर भी सहयोग लिया गया है." प्रधान कहते हैं, "दवाइयों के पैकेट ब्लॉक में पहुंचे तो हैं लेकिन अभी गांव में बाँटे नहीं गए हैं. हमारे क्षेत्र में अभी बुखार या बीमार होने की ज्यादा रिपोर्टों तो नहीं हैं लेकिन कई लोगों का देहांत हुआ है. मैं ऐसे कई लोगों को जानता हूं जो अचानक बीमार हुए और मर गए. इनके टेस्ट तो नहीं करवाए गए थे लेकिन माना जा रहा है कि ये मौतें कोरोना से ही हुई हैं." वहीं, बहराइच के रहने वाले फ़ैज़-उल-हसन के मुताबिक़ पंचांभा हिसामपुर गांव में कई लोग बीमार हैं लेकिन स्वास्थ्य विभाग की कोई टीम यहां नहीं पहुंची है. हरदोई के रहने वाले महादेव पांडे के मुताबिक़ उनके गांव में जिन लोगों ने टीका लगवाया है उनकी तबियत ठीक है. आशा वर्कर गांव में टीकाकरण में लोगों की मदद कर रही हैं.

ये डॉक्टर स्वयं इतने डरे हुए थे कि कोविड वॉर्ड में जाने तक को तैयार नहीं थे. जब ये जानकारी जिलाधिकारी को दी गई तो उनका कहना था, "हम हर स्तर पर मेडिकल स्टाफ़ की कमी का सामना कर रहे हैं इसलिए हम स्थानीय डॉक्टरों को शामिल करने की योजना बना रहे हैं. कुछ को कम समय के लिए कॉन्ट्रैक्ट दिया जाएगा." यूपी सरकार ने अब एमबीबीएस के अंतिम वर्ष के छात्रों को भी ड्यूटी पर लगाया है और इसके बदले उन्हें इंसेटिव भी दिया जा रहा है. रिटायर्ड डॉक्टरों को भी काम पर बुलाया गया है. राज्य के अपर मुख्य सचिव नवनीत सहगल दावा करते हैं कि बीते तीन दिनों में ही इस तरह से 430 से अधिक मेडिकल स्टाफ़ भर्ती किए गए हैं और उन्हें काम पर भी लगा दिया गया है. अब हम रोज़ाना डेढ़ लाख आरटीपीसीआर टेस्ट कर सकते हैं." "हमारे पास एक लाख बेड पहले से उपलब्ध थे लेकिन इस लहर में ऑक्सीजन बेड की जरूरत पड़ रही है. अब हमारे पास लगभग 75 हज़ार ऑक्सीजन बेड हैं और बीस हज़ार से अधिक आईसीयू बेड हैं." यूपी में ग्रामीण क्षेत्रों में संक्रमण बढ़ा है, सरकार को इससे निबटने के लिए और अधिक प्रयास करने होंगे और ग्रामीण क्षेत्रों में मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर मज़बूत करना होगा.

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