दिल्ली में'ड्राई डे' की संख्या 21 से घटाकर 3, शराब पीने वालों को बड़ी राहत

 


देश में लगातार तीसरे दिन कोरोना के केस घटे। सोमवार को 3,06,064 मरीज मिले। लेकिन दुनिया में सबसे ज्यादा नए केस भारत से ही आ रहे हैं। डब्ल्यूएचओ ने कहा कि भारत में एक हफ्ते में नए मामलों में 150% की बढ़ोतरी हुई। बीते हफ्ते 15.94 लाख मरीज मिले। उससे पहले हफ्ते में 6.38 लाख केस आए थे।

गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल होने की इजाजत उन्हीं लोगों को होगी, जिनका कोविड टीकाकरण पूरा हो चुका है यानी दोनों डोज लग चुके हैं। लोगों को वैक्सिनेशन सर्टिफिकेट लेकर जाने होंगे। परेड में 15 साल से कम उम्र के बच्चों के शामिल होने पर रोक रहेगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार कोराष्ट्रीय बाल पुरस्कारविजेताओं को सम्मानित किया। इनमें सिरसा (हरियाणा) के 14 वर्षीय तनिश सेठी भी हैं, जो 10वीं में पढ़ते हैं और 9 ऐप बनाए हैं। उनकेपशुमॉलऐप से मवेशी खरीदे-बेचे जा सकते हैं और 15 हजार किसान यह इस्तेमाल कर रहे हैं।

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल का दावा है कि फलस्तीन के प्रतिबंधित संगठनहमासने पश्चिम विहार के कारोबारी के मोबाइल वॉलेट पर साइबर अटैक करके 31 लाख क्रिप्टोकरंसी लूट ली। इसकी कीमत 4 करोड़ रुपये से ज्यादा है। क्रिप्टो करंसी हमास की मिलिट्री ब्रिगेड के वॉलेट में ट्रांसफर हुई।

26 जनवरी को सुरक्षा इंतजामों का असर मेट्रो सेवाओं पर भी दिखेगा। बुधवार को दोपहर 12 तक येलो लाइन के केंद्रीय सचिवालय, उद्योग भवन, पटेल चौक और लोक कल्याण मार्ग मेट्रो स्टेशनों पर एंट्री-एग्जिट बंद रहेगी। मंगलवार सुबह से बुधवार 2 बजे तक मेट्रो की पार्किंग भी बंद रहेंगी।

दिल्ली की अदालत ने जेएनयू के छात्र शरजील इमाम पर सोमवार को राजद्रोह और UAPA की धाराओं में आरोप तय कर दिए। साल 2019 में CAA और NRC के खिलाफ प्रदर्शनों में शरजील के भाषणों के लिए ये आरोप तय हुए। शरजील ने ये भाषण दिल्ली के जामिया और AMU में दिए थे।

अबू धाबी पर दागी गईं दो मिसाइलों को UAE ने बीच हवा में मार गिराया, हमलावरों को कड़ी चेतावनी - वीडियो किया जारी. मंत्रालय ने बताया कि हमले में कोई हताहत नहीं हुआ है. रोकी गईं और नष्ट की गईं बैलिस्टिक मिसाइलों के अवशेष अबू धाबी के आसपास अलग-अलग इलाकों में गिरे.

उत्तर प्रदेश से लेकर पंजाब तक पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। यहां स्थानीय मुद्दे होकर पाकिस्तान मुद्दा बन गया है। बीजेपी ने अखिलेश को और अमरिंदर सिंह ने नवजोत सिंह सिद्धू को पाकिस्तान परस्त बताया। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने कहा है कि मुझे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री का संदेश मिला था कि नवजोत सिद्धू को सरकार में बहाल किया जाए, क्योंकि वह उनके पुराने दोस्त हैं।

पंजाब में बीजेपी, अमरिंदर सिंह की पंजाब लोक कांग्रेस और सुखदेव ढींढसा के संयुक्त अकाली दल के बीच सोमवार को सीटों का बंटवारा हो गया। बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने इसकी घोषणा की। बीजेपी 65 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। अमरिंदर की पार्टी को 37 और ढींढसा के दल को 15 सीटें मिलीं। बंटवारे की खास बात यह है कि बीजेपी पहली बार पंजाब में ‘बड़े भाई या कहें कि बिग ब्रदर की भूमिका में होगी। बीते 25 वर्षों से बीजेपी पंजाब में शिरोमणि अकाली दल के गठबंधन में जूनियर पार्टनर हुआ करती थी। पिछले चुनाव में बीजेपी को महज 23 सीटें मिली थीं।

पंजाब विधानसभा चुनाव में अभिनेता सोनू सूद की बहन मालविका सूद ने कांग्रेस की टिकट पर मोगा से चुनाव लड़ रही हैं। उनकी उम्मीदवारी पर सोनू सूद ने कहा कि मैं मालविका की बात करूं तो वह इस शहर में रही है। जिनके साथ बड़े हुए वो लोग कांग्रेस के थे।

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने 11 उम्मीदवारों की घोषणा की है। इससे पहले कांग्रेस 53 उम्मीदवारों की घोषणा कर चुकी है। हरीश रावत रामनगर से और हाल ही में बीजेपी से आए हरक सिंह रावत की बहू अनुकृति गुसाईं रावत लैंसडाउन से चुनाव लड़ेंगी।

दिल्ली सरकार ने शराब पीने वालों को बड़ी राहत दी है। दिल्ली में'ड्राई डे' की संख्या 21 से घटाकर 3 कर दी है। अब सिर्फ गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस और गांधी जयंती पर ही ड्राई डे होगा। धार्मिक त्योहारों, महान नेताओं के जन्म दिवस और जयंती को मिलाकर दिल्ली में साल भर 21 ड्राई डे होते थे, जिस दिन शराब की बिक्री और शराब के सेवन पर पूरी तरीके से प्रतिबंध होता था, लेकिन अब दिल्ली सरकार ने साल 2022 में ड्राई डे की संख्या को घटाकर तीन दिन कर दिया है. दिल्ली सरकार ने नई आबकारी नीति के तहत मध निषेध दिवस (dry day) की संख्या घटाकर केवल तीन दिन कर दी है, पहले यह संख्या 21 दिन थी. धार्मिक त्योहारों, महान नेताओं के जन्म दिवस और जयंती को मिलाकर दिल्ली में साल भर 21 ड्राई डे होते थे, जिस दिन शराब की बिक्री और शराब के सेवन पर पूरी तरीके से प्रतिबंध होता था, लेकिन अब दिल्ली सरकार ने साल 2022 में ड्राई डे की संख्या को घटाकर तीन दिन कर दिया है. दिल्ली सरकार की ओर से जारी किए गए नए आदेश के मुताबिक रिपब्लिक डे 26 जनवरी 2022, स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त 2022, गांधी जयंती 2 अक्टूबर 2022 के तीन दिनों को ही ड्राई डे के रूप में माना जाएगा, इन दिनों शराब की बिक्री और सेवन पर पूरी तरीके से प्रतिबंध रहेगा. हालांकि सरकार की ओर से जारी किए गए आदेश के मुताबिक ड्राई डे के इन 3 दिनों में शराब की बिक्री पर प्रतिबंध L-15 लाइसेंस वाले होटलों में लागू नहीं होगा. आदेश में आबकारी विभाग की ओर से बताया गया है कि इन तीन दिनों के अलावा दिल्ली सरकार साल में कभी भी किसी दिन समय समय पर ड्राई डे घोषित कर सकती है, आदेश में कहा गया है कि एक्साइज नियम साल 2010 के नियम 52 में किए गए प्रावधान को लेकर यह आदेश जारी किया गया है, जिसके अंतर्गत साल 2022 में ड्राई डे 26 जनवरी 15 अगस्त और 2 अक्टूबर को मनाया जाएगा, यानी कि इन तीन दिनों शराब की बिक्री और शराब के सेवन पर पूरी तरीके से प्रतिबंध होगा, आदेश में कहा गया है कि आबकारी विभाग की ओर से जारी किए गए लाइसेंसधारी और सभी वेंडर साल 2022 के इस ड्राई डे नियम का पालन करेंगे.

गोवा में कांग्रेस पार्टी यह सुनिश्चित करने के लिए सब कुछ कर रही है कि उसके उम्मीदवार जीतने के बाद अब पार्टी नहीं छोड़ेंगे। कांग्रेस उम्मीदवारों ने विभिन्न धार्मिक स्थलों का दौरा किया और लोगों और पार्टी के प्रति वफादारी का संकल्प लिया।

आईपीएल 2022 में शामिल होने वाली नई टीमें लखनऊ और अहमदाबाद में से लखनऊ की टीम के नाम का ऐलान कर दिया गया है। टीम के मालिक संजीव गोएंका ने खुद इस टीम के नाम का ऐलान किया।

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी ने 159 उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। लिस्ट में सबसे ऊपर नाम अखिलेश यादव का है। वो करहल से चुनाव लड़ रहे हैं। स्वार से जेल में बंद आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम खान को टिकट दिया गया है। वहीं रामपुर से आजम खान को टिकट दिया गया है।

नुसरत जहां ने पहली बार यशदास गुप्ता के साथ अपने रिश्ते को लेकर चुप्पी तोड़ी है। नुसरत ने इसके अलावा बताया कि कैसे मां बनने के बाद उनकी जिंदगी कैसे बदल गई है।

राम मंदिर के मुख्य पुरोहित आचार्य सत्येंद्र दास ने कहा कि इतना विरोध देखने के बाद मैंने योगी आदित्यनाथ जी से कहा कि बेहतर होगा कि वह गोरखपुर से चुनाव लड़ें। वैसे योगी यहां से भी चुनाव जीत जाते लेकिन उन्हें समस्याओं का सामना करना पड़ता।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के चीफ शरद पवार कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं, ट्वीट कर उन्होंने खुद के संक्रमित होने की जानकारी दी है।

शेयर बाजार में सोमवार को दो महीने में सबसे बड़ी गिरावट आई। वैश्विक स्तर पर कमजोर रुख और घरेलू बाजार में चौतरफा बिकवाली से सेंसेक्स एक समय तो 2,050 अंक से ज्यादा टूट गया था। बाद में कुछ सुधार हुआ और यह 1,546 अंक का गोता लगाकर 58,000 से नीचे बंद हुआ। निफ्टी 468.05 अंक गिरावट के साथ 17,149.10 पर बंद हुआ। पिछले साल 26 नवंबर के बाद सेंसेक्स और निफ्टी में एक दिन में इतनी बड़ी गिरावट हुई। लगातार 5वें दिन शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। इन 5 दिनों में सेंसेक्स 3,820 अंक टूटा। इस दौरान निवेशकों को कुल 19.33 लाख करोड़ का नुकसान हुआ। अकेले सोमवार को ही 9.15 लाख करोड़ स्वाहा हो गए। सोमवार को टाटा स्टील, बजाज फाइनेंस के शेयर सबसे ज्यादा गिरे। नायका, जोमैटो पेटीएम जैसी कंपनियों के स्टॉक्स भी पिटे।

उत्तर प्रदेश  विधानसभा चुनाव 2022 के लिए समाजवादी पार्टी ने 159 प्रत्याशियों की लिस्ट जारी कर दी है. सपा प्रमुख अखिलेश यादव मैनपुरी की करहल सीट से चुनाव लड़ेंगे. जबकि सीतापुर जेल में बंद आजम खान रामपुर से चुनावी मैदान में उतरेंगे. वहीं आजम के बेटे अब्दुल्ला को स्वार सीट से टिकट दिया गया है. सपा की पहली लिस्ट जारी होते ही यूपी में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. भारतीय जनता पार्टी का साथ छोड़कर आए स्वामी प्रसाद मौर्या के बेटे उत्कृष्ट मौर्या को टिक नहीं मिला. वे ऊंचाहार सीट से टिकट की मांग कर रहे थे.  समाजवादी पार्टी की पहली लिस्ट में 159 नामों में एमवाई यानी की मुस्लिम-यादव का समीकरण साफ दिखाई देता है. पार्टी ने 31 मुस्लिमों को टिकट दिया है. वहीं 20 यादव प्रत्याशी मैदान में उतरेंगे. इसके साथ-साथ सपा ने ओबीसी मतदाताओं को साधने पर पूरा ध्यान दिया है. पार्टी ने 20 यादवों समेत कुल 66 ओबीसी प्रत्याशियों को टिकट दिया है.  पार्टी ने 11 महिलाओं को टिकट दिया है. सपा ने कांग्रेस छोड़कर आईं सुप्रिया एरन को बरेली कैंट सीट से टिकट दिया है. वहीं छर्रा सीट से लक्ष्मी धनगर, फतेहाबाद से रुपाली दीक्षित और असमौली से मौजूदा विधायक पिंकी सिंह को टिकट दिया है.  अगर सपा प्रत्याशियों को वर्ग के हिसाब से देखा जाए तो वह भी संतुलित नजर आती है. पार्टी ने 32 दलित, 31 मुस्लिम, 11 ब्राम्हण, 9 वैश्य, 5 ठाकुर और 3 सिख प्रत्याशियों को टिकट दिया है. अहम बात यह भी है कि अखिलेश और सपा ने दूसरे दलों से आए नेताओं पर कम भरोसा जताया है. पार्टी ने बसपा से आए 3, कांग्रेस और भाजपा से आए 2-2 नेताओं को टिकट दिया है. समाजवादी पार्टी के प्रत्याशियों की पहली लिस्ट पर भाजपा ने कसा तंज, कहा- लिस्ट नई, अपराधी वही!

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बीएसपी प्रमुख मायावती को भले ही यूपी चुनाव में नदारद बताया जा रहा हो, लेकिन उनके बयानों और भूमिका को नकारा नहीं जा सकता. ऐसा ही एक बयान उन्होंने हाल ही में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी को लेकर दिया है. उन्होंने प्रियंका गांधी पर हमला बोलते हुए कांग्रेस की बजाय बीएसपी को वोट देने की अपील की. दरअसल, पिछले दिनों यूपी चुनाव में कांग्रेस के चेहरे को लेकर पूछे गए सवाल पर प्रियंका गांधी ने कहा था कि ''क्या आपको उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की तरफ़ से कोई और चेहरा दिखाई दे रहा है?'' लेकिन, बाद में प्रियंका गांधी ने इस बयान को वापस ले लिया और कहा कि यूपी में सिर्फ़ वो ही पार्टी का चेहरा नहीं हैं, उन्होंने वो बात चिढ़कर कह दी थी क्योंकि बार-बार एक ही सवाल पूछा जा रहा था. इसे लेकर मायावती ने प्रियंका गांधी को निशाने पर ले लिया और लोगों से कांग्रेस पर वोट बर्बाद ना करने की अपील कर डाली. उन्होंने  ट्वीट किया, ''यूपी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी की हालत इतनी ज़्यादा खस्ताहाल बनी हुई है कि इनकी सीएम की उम्मीदवार ने कुछ घंटों के भीतर ही अपना स्टैंड बदल डाला है. ऐसे में बेहतर होगा कि लोग कांग्रेस को वोट देकर अपना वोट ख़राब करें बल्कि एकतरफ़ा तौर पर बीएसपी को ही वोट दें.'' प्रियंका गांधी ने भी अपने चुनाव में बसपा के असक्रिय रहने पर हैरानी जताई थी और उस पर बीजेपी का दबाव होने की बात कही थी. एक तरफ़ यूपी चुनाव में बीजेपी और समाजवादी पार्टी के बीच कड़ी टक्कर मानी जा रही है. वहीं, बसपा का कांग्रेस पर निशाना लगाना दिलचस्प है. कांग्रेस ना तो इस समय सत्ता में है और ना ही जानकार उसे यूपी चुनाव का बड़ा खिलाड़ी मान रहे हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि मायावती प्रियंका गांधी पर निशाना क्यों साध रही हैं? जानकार इसके पीछे दोनों के वोट बैंक की समानता को वजह मानते हैं. कांग्रेस की राजनीति दलित, मुस्लिम और ब्रह्मणों के इर्दगिर्द रही है. ये तीनों कांग्रेस का वोट बैंक रहे हैं. लेकिन क्षेत्रीय दलों के उभरने के बाद से कांग्रेस का वोट बैंक खिसकना शुरू हो गया. कांग्रेस के वोट बैंक में दरार डाल कर ही ही समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी जैसे दल उभरे हैं और यूपी में कांग्रेस के लिए चुनौती बन गए हैं. कांग्रेस और बसपा दोनों के वोट बैंक का बड़ा आधार जाटव दलित रहे हैं. लेकिन, 1977 में आपातकाल के बाद इसमें गिरावट आनी शुरू हो गई. बाबू जगजीवन राम और राम विलास पासवान जैसे नेताओं के आने से कांग्रेस के इस आधार में सेंध लग गई. इसके बाद 1984 में कांशी राम ने बसपा की स्थापना की. अब दलितों को अपनी पार्टी मिल गई तो वो उसकी तरफ़ चले गए. अब भी कांग्रेस और बसपा के बीच जाटव दलित वोटों को लेकर टकराव है. अगर बसपा का ये वोट बैंक खिसकेगा तो वो कांग्रेस के पास जा सकता है. इसलिए मायावती बयान देकर लोगों को सतर्क करती रहती हैं. डॉक्टर अंबेडकर के साथ कांग्रेस ने ग़लत किया था इस तरह की बातें भी कहती हैं. ये आज की बात नहीं है. कांग्रेस का क्षरण ही बसपा के आने के बाद हुआ. राज्य में तक़रीबन 22 फ़ीसद दलित आबादी है जिनमें जाटव का वोट शेयर काफ़ी बड़ा है. ऐसे में सभी दलों की नज़र इस वोट बैंक पर रहती है. दलितों को लेकर कांग्रेस और बसपा में पहले भी टकराव दिखा है. जब राहुल गांधी के उत्तर प्रदेश में एक दलित के घर रुकने पर मायावती ने कहा था कि राहुल गांधी दलितों के घर से लौटने पर विशेष साबुन से नहाते हैं. बीजेपी के ख़िलाफ़ भी वो बोलती हैं, लेकिन ज़मीनी स्तर पर आक्रामकता नहीं दिखती. वो कांग्रेस के ख़िलाफ़ ज़्यादा आक्रामक बयान देती हैं. बीजेपी और बसपा का उतना समान वोट बैंक नहीं है जितना की कांग्रेस और बसपा का है. मायावती पर 'बहनजी' नाम की किताब के लेखक अजय बोस भी बसपा और कांग्रेस के बीच पुरानी तल्खी होने की बात कहते हैं. इन दोनों ही पार्टियों के नेता एक-दूसरे के दलों में जाते रहे हैं. कांग्रेस का पुराना दलित वोट बसपा ने लिया. अब बसपा का वोट दूसरी पार्टियों में जा रहा है. गैर जाटव वोट कांग्रेस में चला गया. 2009 के लोकसभा चुनाव में भी उनका नुक़सान हुआ था जब कांग्रेस ने अच्छा प्रदर्शन किया था. लेकिन, 2009 के बाद कांग्रेस की हालत बहुत ख़राब हो गई. हालांकि, जानकारों के मुताबिक़ दोनों ही पार्टियां अब तक काफ़ी नीचे गई हैं.

लगभग ऐसी ही स्थिति ब्राह्मण और मुस्लिम वोट के साथ है. एक समय था जब मायावती ब्राह्मण वोटों के समर्थन से मुख्यमंत्री बनी थीं. जानकार कहते हैं कि बसपा ने अपना ये आधार खो दिया है. हालांकि, इस चुनाव में बसपा ने ब्राह्मण वोट साधने की पूरी कोशिश की है. चुनाव में 'प्रबुद्ध सम्मेलन' के साथ प्रचार अभियान की शुरुआत करते हुए ही उन्होंने इसके संकेत दे दिए थे. इस प्रचार अभियान के दौरान उन्होंने ब्राह्मणों के साथ अत्याचार होने और मुसलमानों के साथ सौतेला व्यवहार होने की बात कही थी. इसके लिए उन्होंने बीजेपी, सपा और कांग्रेस तीनों को निशाने पर लिया था. उत्तर प्रदेश में 1989 के विधानसभा चुनाव से कांग्रेस का क्षरण शुरू हुआ था. इसके साथ ही बसपा का भी उदय होने लगा. जो ब्राह्मण और मुस्लिम वोट पहले कांग्रेस के पक्ष में था वो बिखर कर सपा, बसपा और बीजेपी में गया. साल 2002 तक मुलायम सिंह बड़े नेता बनकर उभरे और कांग्रेस बीजेपी के लिए चुनौती बन गए. इसी बीच धीरे-धीरे बसपा ने भी रफ़्तार पकड़ी और अगले ही चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई. ऐसे में कांग्रेस से निकला ब्राह्मण और मुस्लिम वोट सपा और बीजेपी से होते हुए बसपा के पास आया. बसपा को ब्राह्मणों ने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर समर्थन करके जिताया था. 2002 के चुनाव में बीजेपी के ब्राह्मण नेताओं ने भी मायावती का समर्थन किया था क्योंकि उस समय मुलायम सिंह को रोकना था. लेकिन, 2007 में उन्होंने बीजेपी के समर्थन के बिना ब्राह्मणों का समर्थन हासिल कर लिया. उस समय बीजेपी और कांग्रेस दोनों कमज़ोर हो गई थीं. हालांकि, तीन-चार सालों में ही बसपा के पास से ब्राह्मणों का समर्थन कम होता गया. यूपी की राजनीति पर नज़र रखने वालों के अनुसार मायावती चाहती हैं कि अगर उत्तर प्रदेश में बीजेपी कमज़ोर होती है और ब्राह्मण वोट खिसकता है तो वो कांग्रेस में ना जाकर बसपा के पास आए. कांग्रेस के कमज़ोर रहने में उन्हें फ़ायदा मिल सकता है.

 

मुस्लिम वोट का बड़ा हिस्सा भी बसपा, कांग्रेस और सपा के बीच ही रहता है, क्योंकि कांग्रेस कमज़ोर स्थिति में है तो मुस्लिम वोटों का उससे छिटकना संभव है. ये वोट भी बसपा अपनी तरफ़ करना चाहती है. उन्होंने बड़ी संख्या में मुस्लिम उम्मीदवार भी उतारे हैं. यूपी में कांग्रेस को सबसे कमज़ोर स्थिति में बताया जा रहा है. कहा जाता है कि कांग्रेस ज़मीनी स्तर पर अपना आधार खो चुकी है. लेकिन, प्रियंका गांधी यूपी में कांग्रेस को चर्चा में लाने में ज़रूर सफल दिख रही हैं. हाथरस मामला हो, गैंगस्टर विकास दुबे की हत्या या महिलाओं से जुड़े मसले हों, प्रियंका गांधी लगातार सक्रिय नज़र आई हैं. पर उनकी सक्रियता मायावती के लिए मुश्किल बन सकती है. बसपा के संस्थापक कांशीराम पर 'कांशीराम' किताब लिखने वाले प्रोफ़ेसर बद्री नारायण कहते हैं, ''धारणा के स्तर पर कांग्रेस को फ़ायदा हुआ है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर कांग्रेस अभी भी नहीं है. ये आधार का मामला नहीं है. लेकिन विधानसभा चुनाव में कई जगह दो-तीन हज़ार के अंतर से भी फ़ैसला होता है. बिहार में 500 वोट से भी फ़ैसला हुआ है. अभी प्रियंका गांधी का बड़ा प्रभाव नहीं दिख रहा है. लेकिन, कुछ विधानसभा क्षेत्रों में हो सकता है कि ब्राह्मण वोट कांग्रेस में जाएं. कांग्रेस के गिरने के साथ-साथ ही बसपा का उदय हुआ है. इसी तरह अगर कांग्रेस मज़बूत होती है तो बसपा के वोट शेयर पर भी असर पड़ेगा. ऐसे में जनता को कांग्रेस की कमज़ोरी और अस्पष्टता की याद दिलाकर बसपा अपना आधार बनाए रखना चाहती है.

पिछले 24 घंटों के दौरान, पूर्वी गुजरात, उत्तरी कोंकण और गोवा, विदर्भ, मध्य प्रदेश और तेलंगाना के कुछ हिस्सों में न्यूनतम तापमान में 5 से 7 डिग्री की गिरावट आई है। उत्तर-पश्चिम और मध्य के शेष हिस्सों में न्यूनतम तापमान में 3 से 4 डिग्री की गिरावट देखी गई। पश्चिमी हिमालय पर हल्की से मध्यम बारिश और छिटपुट भारी बारिश के साथ हिमपात हुआ। ओडिशा में एक या दो स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हुई। पंजाब के उत्तरी हिस्सों, हरियाणा के कुछ हिस्सों, उत्तर प्रदेश, गंगीय पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और झारखंड में हल्की से मध्यम बारिश हुई। मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, बिहार के कुछ हिस्सों, छत्तीसगढ़, तटीय आंध्र प्रदेश और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में हल्की बारिश हुई। कोंकण और गोवा में छिटपुट हल्की बारिश हुई। अगले 24 घंटों के दौरान, पश्चिमी हिमालय पर हल्की से मध्यम बारिश और हिमपात संभव है। पंजाब के उत्तरी हिस्सों, हरियाणा के कुछ हिस्सों, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और पूर्वोत्तर भारत में कुछ स्थानों पर हल्की बारिश हो सकती है। तटीय आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में हल्की बारिश हो सकती है। उत्तर पश्चिम, मध्य और पूर्वी भारत के न्यूनतम तापमान में और गिरावट सकती है। तेलंगाना के न्यूनतम तापमान में भी 3 से 4 डिग्री की गिरावट सकती है।



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