प्रियंका नहीं ये आंधी है - दूसरी इंदिरा गाँधी है


प्रियंका नहीं ये आंधी है, दूसरी इंदिरा गाँधी है : लगातार लगते कयासों के बीच प्रियंका गांधी औपचारिक रूप से राजनीति में आ गयी हैं। आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनज़र कांग्रेस ने बड़ा फैसला लेते हुए उन्हें महासचिव बनाते हुए पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रभार सौंपा है। वे फरवरी के पहले हफ्ते से अपना कार्यभार संभालेंगी I 


                                                                                           


प्रियंका गाँधी के महासचिव बनते ही राजनीतिक गलियारों की हलचल बढ़ गयी है I उनके महासचिव बनाये जाने पर कांग्रेस में काफी उत्साह है। कार्यकर्ताओं ने प्रियंका नहीं ये आंधी है दूसरी इंदिरा गॉधी है के नारे लगाए। लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने प्रियंका गाँधी के रूप में अपना ब्रह्मास्त्र चल दिया है I दरअसल पिछले तीन दशक से यूपी में हाशिए पर पहुंच चुकी कांग्रेस अब सिर्फ अमेठी और रायबरेली तक ही सिमित रह गयी थी I यूपी में एक अदद चेहरे की तलाश में जुटी कांग्रेस ने प्रियंका और ज्योतिरादित्य सिंधिया को कमान सौंप जहां एक तरफ लोकसभा चुनाव का मुकाबला त्रिकोणीय बना दिया है वहीं, दूसरी तरफ सूबे की सियासत में नई जान फूंक दी है I 


                                                   


अनुमान है कि प्रियंका गांधी की एंट्री हाल हे में हुए  सपा व बसपा गठबंधन के लिए बड़ी चुनौती होगी, साथ ही बीजेपी के लिए भी 2014 के प्रदर्शन को दोहराना आसान नहीं होगा। प्रियंका गांधी को भाजपा का गढ़ माने जाने वाले पूर्वी उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी देने को कांग्रेस का बड़ा दांव कहा जा रहा है।  जहां पार्टी कार्यकर्ता भी प्रियंका के राजनीति में आने को लेकर उत्साहित हैं, वहीं पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को भी उनसे काफी उम्मीदें हैं। कांग्रेस वरिष्ठ नेता मोतीलाल वोरा ने प्रियंका गांधी को महासचिव बनाए जाने पर कहा है कि प्रियंका के आने का असर अन्य क्षेत्रों पर भी पड़ेगा। उन्होंने कहा ,’प्रियंका को दी गयी जिम्मेदारी बेहद अहम है। इसका असर केवल पूर्वी यूपी पर ही नहीं, बल्कि अन्य इलाकों पर भी होगा।’


                                                     


प्रियंका के महासचिव बनाये जाने पर अन्य दलों के नेताओं और प्रवक्ताओं के बयान से उनकी चिंता स्पष्ट रूप से झलकती है। राजनैतिक अफरा -तफरी का माहौल सा बन गया है। 


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