नौनिहालों का भविष्य संवारे शिक्षक

नौनिहालों का भविष्य संवार कर शिक्षा के स्तर में गुणात्मक सुधार लावें गुरूजन-जिलाधिकारी
दो माह में शिक्षा के स्तर में सुधार लाकर सरकार की मंशा और अभिभवकों के विश्वास पर खरे उतरें गुरूजन-जिलाधिकार
श्रावस्ती 26 जुलाई, 2019/सू0वि0/नौनिहाल राष्ट्र के भाग्य विधाता हैं उन्हे शिक्षित कर उनके भाग्य को संवारना सभी गुरूजनों का दायित्व है। सरकार ने जो सभी बच्चों का अभिभावक बनकर उन्हे हर सुविधा मुहैया करा रही है तो गुरूजनों का फर्ज बनता है कि वे अपने कार्य संस्कृति में बदलाव लाकर बाखूबी अपने दायित्व को निभाकर इस जनपद में गिरे शिक्षा के स्तर को उठाने में अपना योगदान दें। गुरूजनों के उपर समाज का जो विश्वास है उस विश्वास को कायम रखने के लिए अब गुरूजनों को चुनौतीपूर्ण रूप से लेना होगा और यह भी ध्यान रखना होगा कि उनके विद्यालय के आस-पास गावों में कोई भी बच्चा शिक्षा के उजियारे से वंचित न रहने पावे। जिस विश्वास के साथ अभिभावक अपने अबोध बच्चे को गुरूजनों को भविष्य संवारने के लिए उनके हवाले किये हैं उस विश्वास पर खरे उतरने का गुरूजनों का फर्ज बनता है। वे उन अबोध कच्चे घड़े को तरास कर उनका भविष्य संवारे ताकि वे उच्च पदों पर आसीन हो सके और अपने परिवार के साथ-साथ समाज और देश का नाम रोशन कर सके।
            उक्त विचार कलेक्ट्रेट सभागार में बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा छात्र/छात्राओं को दी जा रही योजनाओं के सफल संचालन हेतु सम्बन्धित अधिकारियों के साथ बैठक करने के दौरान जिलाधिकारी ओ0पी0 आर्य ने दी है। उन्होने जोर देते हुए कहा कि पूरे भारत वर्ष में इस जनपद का शिक्षा का स्तर जो अन्तिम पायदान पर है जो बहुत ही चिन्ता का विषय है इस कमी को पूरा करने के लिये गुरूजनों को अब दायित्व बोध के साथ अपने जिम्मेदारियों का निर्वहन करना होगा और गुणवत्तापूर्ण ढंग से हर बच्चे को शिक्षित करना होगा ताकि इस जिले का नौनिहाल भी पढ़ लिख कर देश दुनिया में अपना नाम कर सके। जिलाधिकारी ने बैठक में उपस्थित बेसिक शिक्षा अधिकारी से लेकर खण्ड शिक्षा अधिकारी, बी0आर0सी0 एवं एन0पी0आर0सी0 सहित सभी अधिकारियों को अपने कार्यसंस्कृति में बदलाव लाकर बेहतर ढंग से स्कूलों की मानिटरिंग करके हरहाल में दो माह के अन्दर बच्चों के शिक्षा के स्तर में सुधार लाने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही सरकार द्वारा बच्चों को दी जाने वाली सुविधाओं का अकंन एवं वितरण पंजिका का भी प्रत्येक विद्यालय में सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया है।  
            जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि हर गांव एवं मुहल्ले में छह से 14 साल के ऐसे बच्चों को चिन्हित कर सूचीबद्ध किया जाना है, जिनके स्कूलों में दाखिले नहीं हैं। चिन्हित किए जाने वाले सभी बच्चों के अभिभावकों को बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम की जानकारी देकर उन्हें अपने बच्चों के नाम स्कूलों में पंजीकृत कराने के लिए प्रेरित किया जाए। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां इस बात की जानकारी मुहैया कराएंगी कि उनके केंद्रों पर पिछले वर्षो के दौरान पांच साल की आयु वाले कितने बच्चे पंजीकृत थे। इसी के आधार पर उन बच्चों को खोजा जाए। विद्यालय प्रबंध समिति के सभी सदस्य अध्यापकों को बताएंगे कि गांव में किन-किन लोगों के बच्चे स्कूल से वंचित हैं, यह सारा कार्य जल्द से जल्द पूरा करें जिससे अधिक से अधिक नामांकन कराया जाये।
          जिलाधिकारी ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को निर्देशित किया कि शिक्षकों की उपस्थिति, शैक्षिक गुणवत्ता एवं मासिक कलेंडर के अनुसार विद्यालयों में पठन-पाठन की व्यवस्था कराई जाए। अधिक से अधिक नामाकंन कराने हेतु जनपदीय अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी, शिक्षक, शिक्षामित्र एवं विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष एवं अन्य सदस्यों के अलावा क्षेत्र पंचायत अध्यक्ष, बीडीसी सदस्य भी शत-प्रतिशत नामांकन में सहयोग करेंगे। जिलाधिकारी ने बैठक में यूनीफार्म वितरण, पाठ्य-पुस्तक वितरण, स्कूल बैग, जूता-मोजा वितरण सहित मध्यान्ह भोजन के बारे में समीक्षा की।
           इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी अवनीश राय ने कहा कि भारत सरकार एवं प्रदेश सरकार बच्चों की शिक्षा हेतु सभी सुविधाएं उपलब्ध करा रही है तो शिक्षा का स्तर नीचे क्यों है इस पर मंथन करने की बात है। प्राथमिक/उच्च प्राथमिक विद्यालयों में अध्ययनरत छात्र/छात्राओं को साफ-सफाई के प्रति जागरूक करें तथा व्यवहारिक ज्ञान भी दिया जाय। इसके साथ ही बच्चों को ड्रेस, जूता-मोजा पहन कर विद्यालय आने हेतु प्रेरित करें जिससे उनके मानसिक अवधारणा में भी परिवर्तन हो।
             इस अवसर पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ओमकार राणा, खण्ड शिक्षा अधिकारीगण, जिला समन्वयक सर्व शिक्षा अभियान अजीत उपाध्याय सहित अन्य सम्बन्धित अधिकारीगण उपस्थित रहे। 


  रिपोर्ट दिलीप कुमार मिश्रा श्रावस्ती 


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