31 अक्टूबर को J&K और लद्दाख यूटी के रूप में अस्तित्व में

31 अक्टूबर देश के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती है.



जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के जरिए मिले विशेष राज्य का दर्जा खत्म किए जाने के बाद  शुक्रवार 3 मायनों में बेहद खास रहा जिसमें सबसे अहम बात यह रही कि इसको लेकर एक तारीख मुकर्रर हो गई कि जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन बिल के संसद से पास होने के बाद जम्मू-कश्मीर और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश के रूप में किस दिन भारत के नक्शे पर अवतरित होगा.


अनुच्छेद 370 खत्म किए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर में पहला जुमा था और यह दिन अपेक्षाकृत शांति से निकल गया. शाम होते-होते खबर आई कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन बिल पर हस्ताक्षर करने के साथ ही अपनी रजामंदी दे दी. राष्ट्रपति की अनुमति मिलने के बाद अब जम्मू-कश्मीर राज्य के बंटवारे और जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेश के रूप में बनने का रास्ता साफ हो गया.


करगिल हुआ लद्दाख के साथ


राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद केंद्र सरकार ने इस संबंध में घोषणा करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख 31 अक्टूबर को केंद्र शासित प्रदेश (यूटी) के रूप में अस्तित्व में आ जाएंगे. अविभाजित जम्मू-कश्मीर अब तक राज्य की हैसियत से था, लेकिन अब उसे केंद्र शासित प्रदेश के रूप में रहना पड़ेगा. जबकि जम्मू-कश्मीर से अलग किए गए लद्दाख को करगिल के साथ मिलाकर केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया है.


 मंत्रालय ने एक अधिसूचना में कहा, 'जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 (2019 के 34) की धारा 2 के खंड (ए) द्वारा प्रदत्त शक्तियों के अनुरूप, केंद्र सरकार ने इसके लिए अक्टूबर, 2019 के 31वें दिन को निर्धारित किया है, जो कि इस अधिनियम के उद्देश्यों के लिए निर्धारित दिन है. जम्मू-कश्मीर और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश (यूटी) 31 अक्टूबर से अस्तित्व में आ जायेंगे .उल्लेखनीय है कि 31 अक्टूबर देश के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती है. पटेल ने देश की आजादी के बाद 565 रियासतों का भारत गणराज्य में विलय कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी. जम्मू-कश्मीर पुर्नगठन बिल को संसद ने पिछले दिनों मंजूरी प्रदान की थी. इस बिल के अनुसार जम्मू कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश की पुदुचेरी की तरह विधानसभा होगी और लद्दाख चंडीगढ़ की तरह विधायिका के बिना केंद्र शासित प्रदेश होगा. इन दोनों केंद्र शासित प्रदेशों में कानून एवं व्यवस्था का जिम्मा केंद्र के पास होगा. केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में उपराज्यपाल होंगे और इसकी विधानसभा की सदस्य संख्या 107 होगी जिसे सीमांकन के बाद 114 तक बढ़ाया जायेगा.विधानसभा की 24 सीटें रिक्त रहेंगी क्योंकि ये सीटें पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में हैं. जम्मू-कश्मीर विधानसभा में इस समय 87 सीटें है जिनमें से चार सीट लद्दाख क्षेत्र में आती है. लद्दाख अब बिना विधानसभा के एक अलग केंद्र शासित प्रदेश बन जायेगा.केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में करगिल और लेह जिले होंगे. जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 व 35 ए भी हटा दिया गया है.


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