INX मीडिया घोटाले में पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम को राहत नही

INX मीडिया घोटाला


आईएनएक्स मीडिया केस (INX Media Case) में पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया 


UPA-1 सरकार में वित्त मंत्री के रूप में चिदंबरम के कार्यकाल के दौरान एफआईपीबी ने दो उपक्रमों को मंजूरी  दी थी। INX मीडिया मामले में सीबीआई ने 15 मई 2017 को प्राथमिकी दर्ज की थी। इसमें आरोप लगाया गया है कि वित्त मंत्री के रूप में चिदंबरम के कार्यकाल के दौरान 2007 में 305 करोड़ रुपये की विदेशी धनराशि प्राप्त करने के लिए मीडिया समूह को दी गई एफआईपीबी मंजूरी में अनियमितताएं हुईं। इसके बाद ईडी ने पिछले साल इस संबंध में मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया था।  सीबीआई वर्ष 2006 के एयरसेल-मैक्सिम समझौते में एफआईपीबी मंजूरी देने में कथित अनियमितता की भी जांच कर रही है. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी इस संबंध में धन शोधन के मामले की जांच कर रहा है. इस केस में पिछले साल पी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम को गिरफ्तार किया गया था. वे  23 दिनों तक हिरासत में रहे थे. चिदंबरम पर हवाईजहाज की खरीद और एयरसेल के मामले में अलग-अलग केस हैं.जांच एजेंसियों का दावा है कि सन 2007 में जब चिदंबरम तब उन्होंने पीटर मुखर्जी और इंद्राणी मुखर्जी कंपनी आईएनएक्स मीडिया (INX Media) को मंज़ूरी दिलाई. इसके बाद इस कंपनी में कथित रूप से 305 करोड़ का विदेशी निवेश आया. अनुमति मिली थी मात्र पांच करोड़ के निवेश की, लेकिन आईएनएक्स मीडिया में 300 करोड़ से अधिक का निवेश हुआ.  दावा किया गया है कि चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम ने रिश्वत ली थी.सीबीआई का आरोप है कि एक निजी कंपनी, जिस पर कार्ति चिदंबरम का कंट्रोल था, को इंद्राणी और पीटर मुखर्जी के मीडिया हाउस से फंड ट्रांसफर हुआ था.  सीबीआई का आरोप है कि कार्ति ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके आईएनएक्स को फॉरेन डायरेक्ट इनवेस्टमेंट क्लियरेंस हासिल करने में मदद की थी. 


INX मीडिया घोटाले से जुड़े भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में कांग्रेस नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम को करारा झटका लगा है। पूर्व वित्त मंत्री की अग्रिम जमानत की अर्जी दिल्ली हाईकोर्ट  ने खारिज कर दी है। जस्टिस सुनील गौर ने चिदंबरम की याचिका को खारिज करने का फैसला सुनाया। कोर्ट ने 25 जनवरी को इस मामले में अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था। याचिका खारिज होने के बाद गिरफ्तारी से बचने के लिए चिदंबरम ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उनकी लीग टीम आनन-फानन में सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने कपिल सिब्बल से चिदंबरम की याचिका को बुधवार को सीनियर जजों के सामले पेश करने को कहा है। इसके बाद जज तय करेंगे कि मामले की जल्द सुनवाई की जाए या नहीं। हाई कोर्ट के फैसले के बाद सीनियर वकील और कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने वकीलों की एक टीम के साथ उन संभावनाओं पर चर्चा की, जिसके तहत हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में सिब्बल ने चिदंबरम के साथ भी चर्चा की। इसके बाद सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट के अधिकारियों से चिदंबरम की याचिका को रजिस्ट्रार के सामने पेश करने को कहा। इस बीच कांग्रेस के एक अन्य नेता और वकील अभिषेक मनु सिंघवी भी सुप्रीम कोर्ट पहुंचे और चिदंबरम के वकीलों के साथ विचार-विमर्श में शामिल हुए। टीम में चर्चा करने वाले वकीलों में कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद भी शामिल हैं। 


      सुप्रीम कोर्ट से बाहर आने के बाद सिब्बल ने कहा, 'हाई कोर्ट का फैसला आने के बाद हमले जज से कहा कि हमें इस मामले में सुप्रीम कोर्ट जाने का समय मिले, इसके लिए जब तक मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश नहीं होता तब तक इस फैसले पर रोक लगा दी जाए। लेकिन जज ने शाम 4 बजे फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। अब हमने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश से बात की है। सीजेआई ने आज (बुधवार) मामले को सीनियर जजों के सामने याचिका पेश करने को कहा है। इसके बाद सीनियर जज तय करेंगे कि मामले की जल्द सुनवाई की जाए या नहीं।' 


सीबीआई और ईडी ने अग्रिम जमानत का किया था विरोध 
जिरह के दौरान सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), दोनों ने ही चिदंबरम की अर्जी का इस आधार पर विरोध किया था कि उनसे हिरासत में पूछताछ जरूरी है क्योंकि वह सवालों से बच रहे हैं। दोनों जांच एजेंसियों ने दलील दी थी कि चिदंबरम के वित्त मंत्री के तौर पर कार्यकाल के दौरान मीडिया समूह को 2007 में विदेश से 305 करोड़ रुपये की धनराशि प्राप्त करने के लिए विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) मंजूरी प्रदान की गई थी। 

ईडी ने रखी थी जोरदार दलील 
ईडी ने दलील दी कि जिन कंपनियों में राशि हस्तांतरित की गई वे सभी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर चिदंबरम के पुत्र कार्ति द्वारा नियंत्रित हैं और उनके पास यह मानने का एक कारण है कि INX मीडिया को एफआईपीबी मंजूरी उनके पुत्र के हस्तक्षेप पर प्रदान की गई। हाई कोर्ट ने 25 जुलाई 2018 को चिदंबरम को दोनों ही मामलों में गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण प्रदान किया था जिसे समय समय पर बढ़ाया गया। 



  • 15 मई 2017 -  सीबीआई ने प्राथमिकी दर्ज की और आरोप लगाया कि वित्त मंत्री के रूप में चिदंबरम के कार्यकाल के दौरान सन 2007 में 305

  • करोड़ रुपये की विदेशी धनराशि प्राप्त करने के लिए आईएनएक्स मीडिया समूह को दी गई विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) मंजूरी में अनियमितताएं की गईं.

  • 2018 - में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने धनशोधन का मामला दर्ज किया.

  • 23 फरवरी 2018 - आईएनएक्स मीडिया केस में पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम के बेटे कार्ति को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली. एक मार्च को प्रवर्तन निदेशालय के सामने पेश होने का आदेश. कार्ति ने ईडी के समन को रद्द करने की मांग वाली याचिका दाखिल की थी.

  • 28 फरवरी 2018 - जांच एजेंसियों ने कार्ति चिंदबरम को चेन्नई एयरपोर्ट पर गिरफ्तारी किया. चिदंबरम सुप्रीम कोर्ट पहुंचे. उनकी याचिका कोर्ट में दायर होने से पहले कार्ति को पकड़ लिया गया. चिदंबरम ने कहा कि वित्त मंत्री रहते हुए 2007 में उन्होंने खुद आइएनएक्स मीडिया को फॉरेन इन्वेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड (एफआईपीबी) की अनुमति दी थी. इसमें उनके बेटे या परिवार के किसी व्यक्ति की कोई भूमिका नहीं थी.

  • 9 मार्च 2018 - आईएनएक्‍स मीडिया केस मामले में कार्ति चिदंबरम को दिल्ली की पाटियाला हाउस कोर्ट ने सीबीआई की हिरासत में भेज दिया. उन्हें तीन दिन की हिरासत में भेजा गया. कोर्ट ने सीबीआई को कार्ति के सीए भास्करमन के सामने तिहाड़ जेल में पूछताछ की इजाजत भी दे दी.

  • कार्ति को दिल्ली हाईकोर्ट से राहत मिली. कोर्ट ने उन्हें गिरफ्तार किए जाने से 20 मार्च तक के लिए अंतरिम सुरक्षा प्रदान की.

  • 12 मार्च 2018-  दिल्ली की एक अदालत ने कार्ति चिदंबरम की जमानत याचिका खारिज कर दी. अदालत ने कार्ति को 12 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया. सामान्य कैदी की तरह ही तिहाड़ जेल में रखने का आदेश.

  • 23 मार्च 2018 - कार्ति चिदंबरम को दिल्‍ली हाइकोर्ट से जमानत मिली. कोर्ट ने कार्ति को 10 लाख के निजी मुचलके पर जमानत दी. देश से बाहर नहीं जाने के निर्देश. केस से जुड़े गवाहों और सील बैंक एकाउंट के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं करने की हिदायत. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कार्ति और उनकी कंपनी की 1.16 करोड़ की संपत्ति जब्त की.

  • 31 मार्च 2018 - आईएनएक्स मीडिया मामले में अदालत ने पीटर मुखर्जी को 13 अप्रैल तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेजा. जांच एजेंसियों ने कोर्ट में याचिका दायर करके कहा था कि वह पीटर मुखर्जी को कार्ति चिदंबरम के सामने बैठाकर पूछताछ करना चाहती है.

  • 31 मई 2018- पी चिदंबरम की गिरफ्तारी पर दिल्ली हाईकोर्ट ने रोक लगाई. आईएनएक्स मीडिया केस में हाईकोर्ट ने चिदंबरम की गिरफ्तारी पर 3 जुलाई तक के लिए अंतरिम रोक लगा दी.

  • 6 जून 2018 - चिदंबरम से सीबीआई ने चार घंटे तक पूछताछ की.

  • 25 जुलाई 2018- दिल्ली हाई कोर्ट ने पी चिदंबरम की गिरफ्तारी पर रोक लगाई. बाद में यह रोक समय-समय पर बढ़ाई जाती रही.

  • 3 अगस्त 2018 - कार्ति चिदंबरम की अंतरिम जमानत के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया. कार्ति को सुप्रीम कोर्ट ने व्यवसाय के उद्देश्य से 23 जुलाई से 31 जुलाई के बीच अमेरिका, फ्रांस और लंदन जाने की इजाजत दी.

  • 25 अक्टूबर 2018 - आईएनएक्स मामले में जांच एजेंसी ने आरोप पत्र दाखिल किया.

  • नवंबर 2018 - दिल्ली हाई कोर्ट ने चिदंबरम को गिरफ्तारी से 15 जनवरी तक अंतरिम राहत दी.

  • 19 दिसंबर 2018 - प्रवर्तन निदेशालय के समन पर पी चिदंबरम ईडी के दफ्तर पहुंचे। उन्हें 305 करोड़ रूपए के INX मीडिया मामले में पूछताछ के लिए बुलाया गया था.

  • फरवरी 2019 - प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पी चिदंबरम से पांच घंटे तक पूछताछ की.

  • 19 अगस्त 2019 - दिल्ली हाईकोर्ट ने पी चिदंबरम को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया.


INX मीडिया करप्शन केस में फंसे कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम को सुप्रीम कोर्ट से फौरी राहत नहीं मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने चिदंबरम की गिरफ्तारी पर रोक लगाने से इनकार करते हुए कहा कि उनकी अग्रिम जमानत याचिका पर अब चीफ जस्टिस रंजन गोगोई फैसला लेंगे। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस एन. वी. रमन्ना ने कहा कि वह इस मामले को चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के पास भेज रहे हैं। उन्होंने चिदंबरम के वकीलों की टीम को सारी औपचारिकताएं पूरी करने का आदेश दिया।


आज कोर्ट में क्या हुआ? 


सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने पी. चिदंबरम का मामला जस्टिस एन वी रमन्ना के सामने मेंशन करते हुए गिरफ्तारी पर रोक की मांग की। सीबीआई की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सिब्बल की इस मांग पर आपत्ति जाहिर की। जस्टिस रमन्ना ने कहा कि आपके मामले को हम सीजेआई के पास भेज रहे हैं। वहां अपनी मांग रखिएगा। इस पर कपिल सिब्बल ने कहा कि हमें गिरफ्तारी का डर है। हमारी याचिका सुन लीजिए। इसका सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने विरोध किया। जस्टिस रमन्ना ने कहा कि मुख्यन्यायाधीश तय करेंगे कि कब और कौन सुनवाई करेगा। फिलहाल कोर्ट ने गिरफ्तारी पर रोक नहीं लगाई।


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