देश का जीडीपी रेकॉर्ड 23.9 फीसदी गिरा


पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी अब इस दुनिया में नहीं है। इसके साथ ही कोरोना संक्रमण के केस में जिस तरह से इजाफा हुआ है वो डराने वाला है। पैंगोंग लेक के दक्षिणी किनारे स्थित सामरिक तौर पर महत्वपूर्ण इलाके को भारत ने अपने कब्जे में ले लिया जिस पर चीन की नजर थी।


NTA पूरे भारत में 1 से 6 सितंबर तक जेईई मेन 2020 की परीक्षाएं आयोजित कर रहा है। कोविड 19 के कारण परीक्षा केंद्रों के अंदर ले जानी वाली वस्तुओं की सूची को संशोधित किया गया है। रेल मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को कहा कि रेलवे नीट और जेईई की परीक्षाओं में शामिल होने जा रहे विद्यार्थियों एवं उनके अभिभावकों को परीक्षा के दिन मुबंई में विशेष उपनगरीय सेवाओं से यात्रा करने की अनुमति देगा। उन्होंने ट्वीट किया, 'नीट और जेईई परीक्षाओं में शामिल होने जा रहे विद्यार्थियों का सहयोग करते हुए रेलवे ने उन्हें और उनके अभिभावकों को परीक्षा के दिन मुंबई में विशेष उपनगरीय सेवाओं से यात्रा करने की अनुमति दी है। सामान्य यात्रियों से यात्रा नहीं करने का अनुरोध किया जाता है।' राष्ट्रीय अर्हता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) 13 सितंबर को होने जा रही है जबकि अभियांत्रिकी प्रवेश परीक्षा जेईई मुख्य 1 से 6 सितंबर तक कराने की योजना बनाई गई है।करीब 8.58 लाख विद्यार्थियों ने जेईई मुख्य के लिए तथा 15.97 लाख विद्यार्थियों ने नीट के लिए पंजीकरण कराया है।कोरोना वायरस महामारी के चलते ये परीक्षाएं 2 बार टाली जा चुकी हैं।


पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का निधन। ब्रेन सर्जरी के बाद से कोमा में थे 84 साल के मुखर्जी। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू, पीएम नरेंद्र मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने जताया दुख।विश्व के कई नेताओं ने सोमवार को भारत के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के निधन पर शोक व्यक्त किया और कहा कि उन्होंने एक सच्चा मित्र खो दिया है जिन्होंने उनके देशों के साथ भारत के संबंधों को मजबूती प्रदान करने में काफी योगदान दिया। मुखर्जी का सोमवार को राजधानी दिल्ली में सेना के एक अस्पताल में निधन हो गया। प्रणब मुखर्जी के निधन पर भारतीय खिलाड़ियों ने जताया शोक. बांग्लादेश के राष्ट्रपति अब्दुल हामिद और प्रधानमंत्री शेख हसीना ने मुखर्जी के निधन पर शोक व्यक्त किया और उन्हें एक ‘सच्चा मित्र’ बताते हुए देश के 1971 मुक्ति संग्राम में उनके ‘उल्लेखनीय एवं न भूलने वाले’ योगदान को याद किया। हामिद ने मुखर्जी को बांग्लादेश का ‘सच्चा और ईमानदार मित्र’ बताते हुए कहा, ‘उनके निधन से उपमहाद्वीप के राजनीतिक राजनीतिक क्षेत्र को एक अपूरणीय क्षति हुई.



उन्होंने कहा कि मुखर्जी ने बांग्लादेश के 1971 मुक्ति संग्राम के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। हसीना ने कहा, 'मैं भारत के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के निधन से बहुत दु:खी हूं। इस दुख की घड़ी में मेरे विचार और प्रार्थनाएं परिवार के सदस्यों के साथ हैं। नेपाल की राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी, प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली और सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ नेपाल के अध्यक्ष पुष्पकमल दहल ‘प्रचंड’ ने भी मुखर्जी के निधन पर शोक व्यक्त किया। राष्ट्रपति भंडारी ने ट्वीट किया, ‘नेपाल ने एक अच्छा दोस्त खो दिया।’ ओली ने ट्वीट किया, ‘मैं भारत के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के निधन की खबर से बहुत दु:खी हूं।’ ओली ने कहा, 'हम उनके सार्वजनिक जीवन के कार्यकाल में नेपाल-भारत संबंधों को मजबूत करने में उनके योगदान को याद करते हैं।’ प्रचंड ने कहा कि दक्षिण एशिया ने एक बौद्धिक नेता खो दिया है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिर पुतिन ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे एक संदेश में मुखर्जी के निधन पर दुख व्यक्त किया। पुतिन ने एक बयान में कहा, ‘पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के निधन पर मेरी गहरी संवेदना स्वीकार करें। रूस के एक सच्चे मित्र के तौर पर उन्होंने हमारे देशों के संबंधों को मजबूती प्रदान करने में अपना व्यक्तिगत योगदान दिया। श्रीलंकाई प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे ने भी मुखर्जी के निधन पर दु:ख व्यक्त किया। भारत में अमेरिका के राजदूत केन जस्टर ने भी मुखर्जी के निधन पर दु:ख व्यक्त किया। साथ ही मालदीव के राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह और अफगान नेता अब्दुल्ला अब्दुल्ला ने भी ट्वीट करके मुखर्जी के निधन पर दु:ख जताया।


प्रणव मुखर्जी का जन्म पश्चिम बंगाल के वीरभूम जिले में किरनाहर शहर के निकट स्थित मिराती गाँव के एक ब्राह्मण परिवार में कामदा किंकर मुखर्जी और राजलक्ष्मी मुखर्जी के यहाँ हुआ था। उनके पिता 1920 से कांग्रेस पार्टी में सक्रिय होने के साथ पश्चिम बंगाल विधान परिषद में 1952 से 64 तक सदस्य और वीरभूम (पश्चिम बंगाल) जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रह चुके थे। उनके पिता एक सम्मानित स्वतन्त्रता सेनानी थे, जिन्होंने ब्रिटिश शासन की खिलाफत के परिणामस्वरूप 10 वर्षो से अधिक जेल की सजा भी काटी थी। प्रणव मुखर्जी ने वीरभूम के सूरी विद्यासागर कॉलेज में शिक्षा पाई, जो उस समय कलकत्ता विश्वविद्यालय से सम्बद्ध था। कलकत्ता विश्वविद्यालय से उन्होंने इतिहास और राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर के साथ साथ कानून की डिग्री हासिल की है। वे एक वकील और कॉलेज प्राध्यापक भी रह चुके हैं। उन्हें मानद डी.लिट उपाधि भी प्राप्त है। उन्होंने पहले एक कॉलेज प्राध्यापक के रूप में और बाद में एक पत्रकार के रूप में अपना कैरियर शुरू किया। वे बाँग्ला प्रकाशन संस्थान देशेर डाक (मातृभूमि की पुकार) में भी काम कर चुके हैं। प्रणव मुखर्जी बंगीय साहित्य परिषद के ट्रस्टी एवं अखिल भारत बंग साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष भी रहे।


उनका संसदीय कैरियर करीब पाँच दशक पुराना है, जो 1969 में कांग्रेस पार्टी के राज्यसभा सदस्य के रूप में (उच्च सदन) से शुरू हुआ था। वे 1975, 1981, 1993 और 1999 में फिर से चुने गये। 1973 में वे औद्योगिक विकास विभाग के केंद्रीय उप मन्त्री के रूप में मन्त्रिमण्डल में शामिल हुए।वे सन 1982 से 1984 तक कई कैबिनेट पदों के लिए चुने जाते रहे और और सन् 1984 में भारत के वित्त मंत्री बने। सन 1984 में, यूरोमनी पत्रिका के एक सर्वेक्षण में उनका विश्व के सबसे अच्छे वित्त मंत्री के रूप में मूल्यांकन किया गया। उनका कार्यकाल भारत के अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के ऋण की 1.1 अरब अमरीकी डॉलर की आखिरी किस्त नहीं अदा कर पाने के लिए उल्लेखनीय रहा। वित्त मंत्री के रूप में प्रणव के कार्यकाल के दौरान डॉ॰ मनमोहन सिंह भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर थे। वे इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए लोकसभा चुनाव के बाद राजीव गांधी की समर्थक मण्डली के षड्यन्त्र के शिकार हुए जिसने इन्हें मन्त्रिमणडल में शामिल नहीं होने दिया। कुछ समय के लिए उन्हें कांग्रेस पार्टी से निकाल दिया गया। उस दौरान उन्होंने अपने राजनीतिक दल राष्ट्रीय समाजवादी कांग्रेस का गठन किया, लेकिन सन 1989 में राजीव गान्धी के साथ समझौता होने के बाद उन्होंने अपने दल का कांग्रेस पार्टी में विलय कर दिया।उनका राजनीतिक कैरियर उस समय पुनर्जीवित हो उठा, जब पी.वी. नरसिंह राव ने पहले उन्हें योजना आयोग के उपाध्यक्ष के रूप में और बाद में एक केन्द्रीय कैबिनेट मन्त्री के तौर पर नियुक्त करने का फैसला किया। उन्होंने राव के मंत्रिमंडल में 1995 से 1996 तक पहली बार विदेश मन्त्री के रूप में कार्य किया। 1997 में उन्हें उत्कृष्ट सांसद चुना गया। सन 1985 के बाद से वह कांग्रेस की पश्चिम बंगाल राज्य इकाई के भी अध्यक्ष हैं। सन 2004 में, जब कांग्रेस ने गठबन्धन सरकार के अगुआ के रूप में सरकार बनायी, तो कांग्रेस के प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंह सिर्फ एक राज्यसभा सांसद थे। इसलिए जंगीपुर (लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र) से पहली बार लोकसभा चुनाव जीतने वाले प्रणव मुखर्जी को लोकसभा में सदन का नेता बनाया गया। उन्हें रक्षा, वित्त, विदेश विषयक मन्त्रालय, राजस्व, नौवहन, परिवहन, संचार, आर्थिक मामले, वाणिज्य और उद्योग, समेत विभिन्न महत्वपूर्ण मन्त्रालयों के मन्त्री होने का गौरव भी हासिल है। वह कांग्रेस संसदीय दल और कांग्रेस विधायक दल के नेता रह चुके हैं, जिसमें देश के सभी कांग्रेस सांसद और विधायक शामिल होते हैं। इसके अतिरिक्त वे लोकसभा में सदन के नेता, बंगाल प्रदेश कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष, कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की मंत्रिपरिषद में केन्द्रीय वित्त मन्त्री भी रहे। लोकसभा चुनावों से पहले जब प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंह ने अपनी बाई-पास सर्जरी कराई, प्रणव दा विदेश मन्त्रालय में केन्द्रीय मंत्री होने के बावजूद राजनैतिक मामलों की कैबिनेट समिति के अध्यक्ष और वित्त मन्त्रालय में केन्द्रीय मन्त्री का अतिरिक्त प्रभार लेकर मन्त्रिमण्डल के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे। 10 अक्टूबर 2008 को मुखर्जी और अमेरिकी विदेश सचिव कोंडोलीजा राइस ने धारा 123 समझौते पर हस्ताक्षर किए। वे अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के विश्व बैंक, एशियाई विकास बैंक और अफ्रीकी विकास बैंक के प्रशासक बोर्ड के सदस्य भी थे। सन 1984 में उन्होंने आईएमएफ और विश्व बैंक से जुड़े ग्रुप-24 की बैठक की अध्यक्षता की। मई और नवम्बर 1995 के बीच उन्होंने सार्क मन्त्रिपरिषद सम्मेलन की अध्यक्षता की।मुखर्जी को पार्टी के भीतर तो मिला ही, सामाजिक नीतियों के क्षेत्र में भी काफी सम्मान मिला है। अन्य प्रचार माध्यमों में उन्हें बेजोड़ स्मरणशक्ति वाला, आंकड़ाप्रेमी और अपना अस्तित्व बरकरार रखने की अचूक इच्छाशक्ति रखने वाले एक राजनेता के रूप में वर्णित किया जाता है। 2005 के प्रारम्भ में पेटेण्ट संशोधन बिल पर समझौते के दौरान उनकी प्रतिभा के दर्शन हुए। कांग्रेस एक आईपी विधेयक पारित करने के लिए प्रतिबद्ध थी, लेकिन संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन में शामिल वाममोर्चे के कुछ घटक दल बौद्धिक सम्पदा के एकाधिकार के कुछ पहलुओं का परम्परागत रूप से विरोध कर रहे थे। रक्षा मन्त्री के रूप में प्रणव मामले में औपचारिक रूप से शामिल नहीं थे, लेकिन बातचीत के कौशल को देखकर उन्हें आमन्त्रित किया गया था। उन्होंने मार्क्सवादी कम्युनिष्ट नेता ज्योति बसु सहित कई पुराने गठबन्धनों को मनाकर मध्यस्थता के कुछ नये बिंदु तय किये, जिसमे उत्पाद पेटेण्ट के अलावा और कुछ और बातें भी शामिल थीं; तब उन्हें, वाणिज्य मन्त्री कमल नाथ सहित अपने सहयोगियों यह कहकर मनाना पड़ा कि: "कोई कानून नहीं रहने से बेहतर है एक अपूर्ण कानून बनना।"[11] अंत में 23 मार्च 2005 को बिल को मंजूरी दे दी गई। मुखर्जी की खुद की छवि पाक-साफ है, परन्तु सन् 1998 में रीडिफ.कॉम को दिये गये एक साक्षात्कार में उनसे जब कांग्रेस सरकार, जिसमें वह विदेश मंत्री थे, पर लगे भ्रष्टाचार के बारे में पूछा गया था तो उन्होंने कहा - "भ्रष्टाचार एक मुद्दा है। घोषणा पत्र में हमने इससे निपटने की बात कही है। लेकिन मैं यह कहते हुए क्षमा चाहता हूँ कि ये घोटाले केवल कांग्रेस या कांग्रेस सरकार तक ही सीमित नहीं हैं। बहुत सारे घोटाले हैं। विभिन्न राजनीतिक दलों के कई नेता उनमें शामिल हैं। तो यह कहना काफी सरल है कि कांग्रेस सरकार भी इन घोटालों में शामिल थी।"प्रणव मुखर्जी के नाम पर एक बार भारतीय राष्ट्रपति जैसे सम्मानजनक पद के लिए भी विचार किया गया था। लेकिन केंद्रीय मंत्रिमण्डल में व्यावहारिक रूप से उनके अपरिहार्य योगदान को देखते हुए उनका नाम हटा लिया गया। मुखर्जी की वर्तमान विरासत में अमेरिकी सरकार के साथ असैनिक परमाणु समझौते पर भारत-अमेरिका के सफलतापूर्वक हस्ताक्षर और परमाणु अप्रसार सन्धि पर दस्तखत नहीं होने के बावजूद असैन्य परमाणु व्यापार में भाग लेने के लिए परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह के साथ हुए हस्ताक्षर भी शामिल हैं। सन 2007 में उन्हें भारत के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से नवाजा गया। मनमोहन सिंह की दूसरी सरकार में मुखर्जी भारत के वित्त मन्त्री बने। इस पद पर वे पहले 1980 के दशक में भी काम कर चुके थे। 6 जुलाई 2009 को उन्होंने सरकार का वार्षिक बजट पेश किया। इस बजट में उन्होंने क्षुब्ध करने वाले फ्रिंज बेनिफिट टैक्स और कमोडिटीज ट्रांसक्शन कर को हटाने सहित कई तरह के कर सुधारों की घोषणा की। उन्होंने ऐलान किया कि वित्त मन्त्रालय की हालत इतनी अच्छी नहीं है कि माल और सेवा कर लागू किये बगैर काम चला सके। उनके इस तर्क को कई महत्वपूर्ण कॉरपोरेट अधिकारियों और अर्थशास्त्रियों ने सराहा। प्रणव ने राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी अधिनियम, लड़कियों की साक्षरता और स्वास्थ्य जैसी सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं के लिए समुचित धन का प्रावधान किया। इसके अलावा उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग विकास कार्यक्रम, बिजलीकरण का विस्तार और जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीकरण मिशन सरीखी बुनियादी सुविधाओं वाले कार्यक्रमों का भी विस्तार किया। हालांकि, कई लोगों ने 1991 के बाद लगातार बढ़ रहे राजकोषीय घाटे के बारे में चिन्ता व्यक्त की, परन्तु मुखर्जी ने कहा कि सरकारी खर्च में विस्तार केवल अस्थायी है और सरकार वित्तीय दूरदर्शिता के सिद्धान्त के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।


     बंगाल भारत में वीरभूम जिले के मिराती (किर्नाहार) गाँव में 11 दिसम्बर 1935 को कामदा किंकर मुखर्जी और राजलक्ष्मी मुखर्जी के घर जन्मे प्रणव का विवाह बाइस वर्ष की आयु में 13 जुलाई 1957 को शुभ्रा मुखर्जी के साथ हुआ था। उनके दो बेटे और एक बेटी - कुल तीन बच्चे हैं। पढ़ना, बागवानी करना और संगीत सुनना- तीन ही उनके व्यक्तिगत शौक भी हैं। न्यूयॉर्क से प्रकाशित पत्रिका, यूरोमनी के एक सर्वेक्षण के अनुसार, वर्ष 1984 में दुनिया के पाँच सर्वोत्तम वित्त मन्त्रियों में से एक प्रणव मुखर्जी भी थे। वित्त मन्त्रालय और अन्य आर्थिक मन्त्रालयों में राष्ट्रीय और आन्तरिक रूप से उनके नेतृत्व का लोहा माना गया। वह लम्बे समय के लिए देश की आर्थिक नीतियों को बनाने में महत्वपूर्ण व्यक्ति के रूप में जाने जाते हैं। उनके नेत़त्व में ही भारत ने अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के ऋण की 1.1 अरब अमेरिकी डॉलर की अन्तिम किस्त नहीं लेने का गौरव अर्जित किया। उन्हें प्रथम दर्जे का मन्त्री माना जाता है और सन 1980-1985 के दौरान प्रधानमन्त्री की अनुपस्थिति में उन्होंने केन्द्रीय मन्त्रिमण्डल की बैठकों की अध्यक्षता की। उन्हें सन् 2008 के दौरान सार्वजनिक मामलों में उनके योगदान के लिए भारत के दूसरे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्म विभूषण से नवाजा गया। प्रणव मुखर्जी को 26 जनवरी 2019 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया।


 पूर्वी लद्दाख में चीनी सेना की नापाक कोशिश नाकाम। पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे तक चढ़ आए थे 500 चीनी सैनिक। चौकस भारतीय सेना ने पीछे धकेला। वहीं, चीन ने कैलाश-मानसरोवर इलाके से मिसाइलें दागने का किया इंतजाम।


 अदालत की अवमानना के दोषी प्रशांत भूषण बतौर जुर्माना चुकाएंगे एक रुपया। सुप्रीम कोर्ट ने सुनाई थी जुर्माने की सजा। भूषण ने आदेश के खिलाफ रिव्यू पिटीशन दाखिल करने का संकेत भी दिया।


 इकॉनमी का बुरा हाल। इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में देश का जीडीपी रेकॉर्ड 23.9 फीसदी गिरा। वहीं, जुलाई में इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े आठ सेक्टरों में करीब 10 प्रतिशत . केन्द्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा आज यहां जारी जीडीपी के तिमाही आंकड़ों के अनुसार पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह दर 5.2 प्रतिशत रही थी। लॉकडाउन के कारण देश में आर्थिक गतिविधियां पूरी तरह से बंद हो गई थी। मार्च के अंतिम सप्ताह से लेकर मई मध्य तक पूरे देश में पूर्ण बंदी रही थी। इसके बाद सरकार ने चरणबद्ध तरीके से सामाजिक दूरी के मानदंडों का पालन करते हुये विनिर्माण सहित विभिन्न गतिविधियों को शुरू करने की अनुमति दी थी और अब तक सभी क्षेत्र कोरोना से पहले की स्थिति में काम नहीं कर रहे हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में देश की जीडीपी 2689556 करोड़ रुपए रहा है जो पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि के 3535267 करोड़ रुपए की तुलना में 23.9 प्रतिशत कम है। इस तरह से देश के जीडीपी की वृद्धि दर शून्य से 23.9 प्रतिशत नीचे रही है। सरकार का वित्तीय घाटा 103 प्रतिशत पर पहुंचा : चालू वित्त वर्ष के पहले चार महीने में अप्रैल से जुलाई तक सरकार का वित्तीय घाटा बजट अनुमान के 103 प्रतिशत को पार कर गया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 4 महीने में कोरोना काल के दौरान वित्तीय घाटा 8.21 लाख करोड़ रुपए रहा है। इस अवधि में कुल कर राजस्व संग्रह 2.03 लाख करोड़ रुपए रहा जबकि कुल व्यय 10.5 लाख करोड़ रुपए रहा। कोरोना वायरस से निटपने के लिए सरकार द्वारा किए गए व्यापक स्तर पर व्यय और लॉकडाउन के कारण कर राजस्व में गिरावट आने के कारण वित्तीय घाटा बजट अनुमान को पार कर गया है।


 जम्मू कश्मीर के बारामुला में सेना के काफिले पर आतंकवादियों का ग्रेनेड अटैक, छह नागरिक घायल।


 सुशांत सिंह राजपूत केस में रिया और शौविक चक्रवर्ती से फिर पूछताछ कर रही सीबीआई। वहीं नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने रिया के खिलाफ दर्ज किया क्रिमिनल केस।


आज का सबसे बड़ा न्यूज़ पॉइंट है, खिलौनों और कंप्यूटर गेम्स को देश में बनाने की पीएम नरेंद्र मोदी की अपील।


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दिल्ली सरकार ने प्राइवेट स्कूलों को ट्यूशन फीस को छोड़कर कोई अतिरिक्त शुल्क वसूलने के विरूद्ध चेतावनी दी है,साथ ही सरकार ने सख्त शब्दों में कहा है कि उल्लंघन करने वाले स्कूलों को दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम एवं नियमावली , 1973 के तहत दंडित किया जाएगा।


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