तालिबान ने रणनीति बदली , कट्टरपंथी विचारधारा नहीं

 

अफगानिस्तान पर पूरी तरह तालिबान का कब्जा हो गया है, वहीं तालिबान कमांडरों का कहना है कि उन्होंने अफगान राष्ट्रपति भवन पर कब्जा कर लिया है।  जिसके बाद राष्ट्रपति अशरफ गनी देश छोड़कर भाग गए। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिये बताया कि आखिर वह देश से क्यों भागे। इस बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अफगानिस्तान से सैन्य वापसी के तौर-तरीकों को लेकर मौजूदा राष्ट्रपति जो बाइडन की नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अगर वह राष्ट्रपति होते अमेरिकी सैनिकों की वापसी अलग होती। यहां तालिबान के एक अधिकारी ने कहा है कि विद्रोही संगठन जल्द ही काबुल स्थित राष्ट्रपति परिसर से अफगानिस्तान को इस्लामी अमीरात बनाने की घोषणा करेगा। 11 सितंबर 2001 के आतंकी हमलों के बाद, अमेरिका नीत बलों द्वारा अफगानिस्तान से तालिबान को अपदस्थ करने के लिए शुरू किए गए हमलों से पहले भी आतंकी संगठन ने युद्धग्रस्त देश का नाम इस्लामी अमीरात अफगानिस्तान रखा हुआ था। अफगानिस्तान पर पूरी तरह क़ब्ज़े के करीब पहुंचा तालिबान। काबुल के बाहर खड़े हुए उसके लड़ाके। तालिबान का कहना है कि वह शांति से हासिल करेगा सत्ता। राजधानी में फिलहाल नहीं घुसेगा। अफगानिस्तान सरकार ने शुरू कर दी है सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया। वहां हालात खराब हैं, लोगों में डर का माहौल है। काबुल से दिल्ली आए लोगों ने बताया है कि किस तरह वहां तालिबान का खौफ फैल रहा है। काबुल से आई महिला ने बयां की अफगानिस्तान की स्थिति. तालिबान ने जलालाबाद पर किया कब्जा, काबुल में बिजली सप्लाई को किया ध्वस्त. रक्तपात से बचने के लिए छोड़ दिया अफगानिस्तान : अशरफ गनी.

पश्तो जुबान में छात्रों को तालिबान कहा जाता है. नब्बे के दशक की शुरुआत में जब सोवियत संघ अफ़ग़ानिस्तान से अपने सैनिकों को वापस बुला रहा था, उसी दौर में तालिबान का उभार हुआ. माना जाता है कि पश्तो आंदोलन पहले धार्मिक मदरसों में उभरा और इसके लिए सऊदी अरब ने फंडिंग की. इस आंदोलन में सुन्नी इस्लाम की कट्टर मान्यताओं का प्रचार किया जाता था. जल्दी ही तालिबानी अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान के बीच फैले पश्तून इलाक़े में शांति और सुरक्षा की स्थापना के साथ-साथ शरिया क़ानून के कट्टरपंथी संस्करण को लागू करने का वादा करने लगे थे. इसी दौरान दक्षिण पश्चिम अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान का प्रभाव तेजी से बढ़ा. सितंबर, 1995 में उहोंने ईरान की सीमा से लगे हेरात प्रांत पर कब्ज़ा किया. इसके ठीक एक साल बाद तालिबान ने अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी क़ाबुल पर कब्ज़ा जमाया. उन्होंने उस वक्त अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति रहे बुरहानुद्दीन रब्बानी को सत्ता से हटाया था. रब्बानी सोवियत सैनिकों के अतिक्रमण का विरोध करने वाले अफ़ग़ान मुजाहिदीन के संस्थापक सदस्यों में थे. साल 1998 आते-आते, क़रीब 90 प्रतिशत अफ़ग़ानिस्तान पर तालिबान का नियंत्रण हो गया था. सोवियत सैनिकों के जाने के बाद अफ़ग़ानिस्तान के आम लोग मुजाहिदीन की ज्यादतियों और आपसी संघर्ष से ऊब गए थे इसलिए पहले पहल तालिबान का स्वागत किया गया. भ्रष्टाचार पर अंकुश, अराजकता की स्थिति में सुधार, सड़कों का निर्माण और नियंत्रण वाले इलाक़े में कारोबारी ढांचा और सुविधाएं मुहैया कराना- इन कामों के चलते शुरुआत में तालिबानी लोकप्रिय भी हुए. लेकिन इसी दौरान तालिबान ने सज़ा देने के इस्लामिक तौर तरीकों को लागू किया जिसमें हत्या और व्याभिचार के दोषियों को सार्वजनिक तौर पर फांसी देना और चोरी के मामले में दोषियों के अंग भंग करने जैसी सजाएं शामिल थीं. पुरुषों के लिए दाढ़ी और महिलाओं के लिए पूरे शरीर को ढकने वाली बुर्क़े का इस्तेमाल ज़रूरी कर दिया गया. तालिबान ने टेलीविजन, संगीत और सिनेमा पर पाबंदी लगा दी और 10 साल और उससे अधिक उम्र की लड़कियों के स्कूल जाने पर रोक लगा दी. तालिबान पर मानवाधिकार के उल्लंघन और सांस्कृतिक दुर्व्यवहार से जुड़े कई आरोप लगने शुरू हो गए थे. इसका एक बदनामी भरा उदाहरण साल 2001 में तब देखने को मिला जब तालिबान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विरोध के बाद भी मध्य अफ़ग़ानिस्तान के बामियान में बुद्ध की प्रतिमा को नष्ट कर दिया. तालिबान को बनाने और मज़बूत करने के आरोपों से पाकिस्तान लगातार इनकार करता रहा है लेकिन इस बात में कोई संदेह नहीं है कि शुरुआत में तालिबानी आंदोलन से जुड़ने वाले लोग पाकिस्तान के मदरसों से निकले थे. अफ़ग़ानिस्तान पर जब तालिबान का नियंत्रण था तब पाकिस्तान दुनिया के उन तीन देशों में शामिल था जिसने तालिबान सरकार को मान्यता दी थी. पाकिस्तान के अलावा सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने भी तालिबान सरकार को स्वीकार किया था. एक समय ऐसा भी आया जब तालिबान ने उत्तर पश्चिम में अपने नियंत्रण वाले इलाक़े से पाकिस्तान को अस्थिर करने की धमकी भी दी. इसी दौर में तालिबानी चरमपंथियों ने अक्टूबर, 2012 को मिंगोरा नगर में अपने स्कूल से घर लौट रही मलाला यूसुफ़ज़ई को गोली मार दी थी. कहा गया कि तालिबानी शासन के अत्याचार पर छद्म नाम से लिखने के चलते 14 साल की मलाला से तालिबानी नाराज़ थे. इस घटना में मलाला बुरी तरह घायल हो गई थीं. उस वक्त पाकिस्तान में नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस घटना की निंदा हुई थी. इस घटना के दो साल बाद तालिबानी चरमपंथियों ने पेशावर के एक स्कूल पर हमला किया था जिसके बाद पाकिस्तान में तालिबान का प्रभाव काफ़ी कम हो गया. साल 2013 में अमेरिकी ड्रोन हमले में तालिबान का पाकिस्तान में कमान संभाल रहे हकीमुल्ला मेहसूद सहित तीन अहम नेताओं की मौत हुई.

भारी संख्या में विदेशी सैनिकों की मौजूदगी के बाद भी तालिबान ने धीरे-धीरे खुद को मज़बूत किया और अफ़ग़ानिस्तान में अपने प्रभाव को बढ़ाया. इसका नतीजा है कि देश में असुरक्षा और हिंसा का वैसा माहौल फिर से दिखने लगा है जो 2001 के बाद कभी नहीं देखा गया था. सितंबर, 2012 में तालिबान लड़ाकों ने काबुल में कई हमले किए और नैटो के कैंप पर भी धावा बोला. साल 2013 में शांति की उम्मीद तब जगी जब तालिबान ने क़तर में दफ़्तर खोलने का एलान किया. हालांकि तब तालिबान और अमेरिकी सेना का एकदूसरे पर भरोसा कमज़ोर था जिसके चलते हिंसा नहीं थमी. अगस्त, 2015 में तालिबान ने स्वीकार किया कि संगठन ने मुल्ला उमर की मौत को दो साल से ज़्यादा समय तक ज़ाहिर नहीं होने दिया. मुल्ला उमर की मौत कथित स्वास्थ्य समस्याओं के चलते पाकिस्तान के एक अस्पताल में हुई थी. इसी महीने समूह ने मुल्ला मंसूर को अपना नया नेता चुने जाने की घोषणा कीइसी दौरान तालिबान ने साल 2001 की हार के बाद पहली बार किसी प्रांत की राजधानी पर अपना नियंत्रण हासिल कर लिया था, रणनीतिक तौर पर बेहद अहम शहर कुंडूज़ पर उन्होंने नियंत्रण स्थापित किया. मुल्ला मंसूर की हत्या अमेरिकी ड्रोन हमले में मई, 2016 में हुई और उसके बाद संगठन की कमान उनके डिप्टी रहे मौलवी हिब्तुल्लाह अख़ुंज़ादा को सौंपी गई, अभी इन्हें के हाथों में तालिबान का नेतृत्व हैफरवरी, 2020 में अमेरिका और तालिबान के बीच शांति समझौता हुआ. कई दौर की बातचीत के बाद ये समझौता हुआ था. इसके बाद तालिबान ने शहरों और सैन्य ठिकानों पर हमले के बाद कुछ ख़ास तरह के लोगों को निशाना बनाने की शुरुआत की और ऐसे हमलों से उसने अफ़ग़ानिस्तान की जनता को आतंकित कर दिया. इन हमलों में तालिबान ने पत्रकारों, न्यायाधीशों, शांति कार्यकर्ता, और रसूख के पदों पर बैठी महिलाओं को निशाना बनाया गया, ज़ाहिर है तालिबान ने केवल अपनी रणनीति बदली थी, कट्टरपंथी विचारधारा नहीं. अफ़ग़ानिस्तान के अधिकारियों ने गंभीर तौर चिंता जताई थी कि अंतरराष्ट्रीय मदद के बिना अफ़ग़ानिस्तान के सामने अस्तित्व बचाने का संकट होगा लेकिन अमेरिका के नए राष्ट्रपति जो बाइडन ने अप्रैल, 2021 में एलान कर दिया कि 11 सितंबर तक सभी अमेरिकी सैनिक वापस लौटेंगे. दो दशक तक चले एक युद्ध में अमेरिकी महाशक्ति को छकाने के बाद तालिबान ने बड़े क्षेत्र पर कब्ज़ा किया . काबुल में तालिबान के दाख़िल होने के बाद राजधानी से आम और ख़ास लोगों के भागने और अफ़रा-तफ़री का माहौल रविवार देर रात तक जारी रहा है . तालिबान ने कहा- अफ़ग़ानिस्तान में 'युद्ध ख़त्म', शासन व्यवस्था के बारे में जल्द देंगे जानकारी तालिबान के प्रवक्ता ने  कि तालिबान नहीं सोचता है कि विदेशी सेनाएंअफ़ग़ानिस्तान में अपने नाकाम अनुभव को दोहराएंगी.

अफगानिस्तान: UN चीफ ने तालिबान सहित सभी पक्षों से संयम बरतने का आह्वान किया, आज बैठक

भारत के 75वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर न्यूयॉर्क स्थित टाइम्स स्क्वायर पर रविवार को विशाल तिरंगा फहराया गया और इस दौरान ''वंदे मातरम'' और ''भारत माता की जय'' के नारों से पूरा वातावरण गूंज उठा. भारतीय समुदाय के प्रमुख संगठन फेडरेशन ऑफ इंडियन एसोसिएशन- न्यूयॉर्क, न्यू जर्सी और कनेक्टिकट (एफआईए- एनवाई एनजे सीटी) द्वारा आयोजित कार्यक्रम में 48 वर्ग फुट लंबा तिरंगा 25 फुट ऊंचे ध्वज स्तंभ पर फहराया गया. न्यूयॉर्क में भारत के महावाणिज्यदूत रणधीर जायसवाल ने तिरंगा फहराया.

संघ प्रमुख मोहन भागवत ने चीन पर निर्भरता को लेकर चेताया। कहा- हम कितना भी चीन के बारे में चिल्लाएं, लेकिन हमारे फोन की सारी चीज़ें वहीं से आती हैं। चीन पर निर्भरता बढ़ी तो उसके सामने झुकना पड़ेगा। संघ प्रमुख ने आत्मनिर्भर होने की अपील करते हुए कहा कि स्वदेशी होने का मतलब है अपनी शर्तों पर कारोबार करना।

कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर साधा निशाना। वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा- सात साल से पीएम का एक ही तरह का भाषण सुन रहा देश। योजनाओं पर नहीं हो रहा अमल। नए कृषि क़ानून वापस नहीं लेने पर सरकार की आलोचना की।

चीफ जस्टिस एनवी रमना ने संसद में बहस के गिरते स्तर पर जताई चिंता। एक कार्यक्रम में कहा- पहले सदनों में होती थी रचनात्मक बहस। अब क़ानून बनाते समय होती है बहुत अस्पष्टता। इसके कारण बढ़ रही है मुकदमेबाजी।

कोरोना की रोकथाम के लिए महाराष्ट्र ने सख्त की पाबंदी। अब कोविड की नेगेटिव रिपोर्ट दिखाने और वैक्सीन की दोनों डोज लगवाने वालों को ही राज्य में मिलेगी एंट्री। इन नियमों को पूरा नहीं करने वालों 14 दिन तक रहना होगा क्वारंटीन।

स्वतंत्रता दिवस ऑफर के तहत 31 अगस्त होम लोन पर प्रोसेसिंग फीस नहीं लेगा स्टेट बैंक ऑफ इंडिया। ग्राहकों को 6.70 फीसदी की ब्याज दर पर मिलेगा कर्ज। होम लोन का 0.40 फीसदी प्रोसेसिंग फीस के रूप में वसूलता है SBI

जेसिका लाल की बहन सबरीना लाल की डेथ हो गई है, गौर हो कि जेसिका लाल के हत्यारों को न्याय के कठघरे में लाने के लिए उन्होंने काफी लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी थी।

यूपी के एटा से एक बेहद ही शर्मनाक घटना सामने आई है, यहां एक महीने की लड़की के साथ रेप का घटना हुई है, बताया जा रहा है कि इस घटना का आरोपी 17 साल का एक लड़का है। लड़के ने कथित तौर पर बच्ची के साथ उस वक्त बलात्कार किया जब उसकी मां भैंस बांधने गई हुई थी।

हैती में शनिवार को 7.2 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आने से इमारतें भरभरा कर ढह गईं और कम से कम 724 लोगों की मौत हो गई तथा कम से कम 2800 लोग घायल हुए हैं। हैती की नागरिक सुरक्षा एजेंसी के निदेशक जैरी चांडलर की ओर से पहले बताया गया था कि मृतक संख्या 304 है और सबसे ज्यादा लोग देश के दक्षिण में हताहत हुए हैं। शनिवार को भूकंप आने से कई शहर पूरी तरह से तबाह हो चुके हैं और भूस्खलन होने से बचाव अभियान प्रभावित हो रहा है। भूकंप के कारण कोरोनावायरस महामारी से पहले से बुरी तरह प्रभावित हैती के लोगों की पीड़ा और भी बढ़ गई है। अमेरिकी भूगर्भीय सर्वेक्षण ने कहा है कि भूकंप का केंद्र राजधानी पोर्ट प्रिंस से करीब 125 किलोमीटर की दूरी पर था। अगले हफ्ते की शुरुआत में संकट और भी बढ़ सकता है क्योंकि तूफान ग्रेस सोमवार या मंगलवार तक हैती पहुंच सकता है। भूकंप के बाद दिनभर और रात तक झटके महसूस किए जाते रहे। बेघर हो चुके लोग और वे लोग जिनके मकान ढहने के कगार पर हैं, ने खुले में सड़कों पर रात बिताई। प्रधानमंत्री एरियल हेनरी ने कहा कि वह ऐसे स्थानों पर मदद भिजवा रहे हैं, जहां पर शहर तबाह हो चुके हैं और अस्पताल मरीजों से भर गए हैं। प्रधानमंत्री ने पूरे देश में एक महीने की आपात स्थिति की घोषणा की है और कहा है कि जब तक क्षति का आकलन नहीं हो जाता तब तक वह अंतरराष्ट्रीय मदद नहीं मांगेंगे। उन्होंने कहा कि कुछ शहर तो पूरी तरह से तबाह हो चुके हैं। चांडलर ने बताया कि कम से कम 860 मकान नष्ट हो गए तथा 700 से अधिक क्षतिग्रस्त हो गए। अस्पताल, स्कूल, कार्यालय और गिरजाघर भी प्रभावित हुए हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने यूएसऐड प्रशासक सामंथा पॉवर को हैती को अमेरिकी मदद देने के लिए समन्वयक अधिकारी के रूप में नियुक्त किया है।

75वें स्वतंत्रता दिवस पर योग गुरु बाबा रामदेव ने टोक्यो ओलंपिक में भारत का मान बढ़ाने वाले पदक विजेता खिलाड़ियों को पतंजलि का ब्रांड एंबेसडर बनाए जाने की घोषणा की है। साथ ही कहा कि पतंजलि आयुर्वेद के माध्यम से मेडिकल टेररिज्म से राष्ट्र को आजादी दिलाएगा।

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