बीजेपी का झंडा पड़ोसियों ने पीटा,जान की धमकी

 2 अप्रैल 2022 से शुरू, नवरात्र के पहले दिन घटस्थापना का विधान.



आर्थिक संकट से जूझ रहे श्रीलंका में राष्ट्रपति राजपक्षे ने इमरजेंसी लगा दी है। सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों को रोकने के लिए सेना को और अधिकार मिल गए हैं।

 भारत और नेपाल की दोस्ती का आज एक और अध्याय शुरू होगा। बिहार के जयनगर और नेपाल के कुर्था के बीच रेल सेवा का पीएम मोदी और नेपाली पीएम देउबा उद्घाटन करेंगे।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने एक बार फिर भारत की तारीफ की। उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान की विदेश नीति साफ है। कोई देश भारत को धमकी देने की नहीं सोच सकता है। उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान हमारे साथ ही आजाद हुआ था। उनकी विदेश नीति देखिए। सोवियत यूनियन और अमेरिका के बीच कोल्ड वार चल रही थी। उन्होंने अपनी लाइन ली। सोवियत यूनियन से बात करते रहे।

पीएम नरेंद्र मोदी को मारने की साजिश बेनकाब कर दी गई है। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक  20  किलो RDX से मारने की साजिश स्लीपर सेल के जरिए पीएम को मारने की साजिश रच रही थीं। सुरक्षा एजेंसियां जानकारी जुटा रही हैं पीएम मोदी को मारने की साजिश के संबंध में जो ई-मेल  मिला है उसका स्रोत कहां से जुड़ा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को ‘परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम में ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान ध्यान लगाने की सलाह दी। पीएम ने उनसे पूछा कि जब ऑनलाइन रीडिंग करते हैं तो सचमुच पढ़ाई करते हैं या (सोशल मीडिया में) रील्स देखते हैं। माध्यम चाहे ऑनलाइन हो या ऑफलाइन, समस्या मन का भटकना है।

बीजेपी 1990 के बाद से राज्यसभा में 100 का आंकड़ा छूने वाली पहली पार्टी बनी। गुरुवार को हुए चुनाव में असम, त्रिपुरा और नगालैंड में बीजेपी ने एक-एक सीट पर जीत दर्ज की। इसके बाद ऊपरी सदन में बीजेपी के सदस्यों की संख्या पहली बार 100 के पार पहुंच गई।

रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। 40 मिनट तक चली इस बैठक में पीएम मोदी ने कहा कि हिंसा को त्याग कर शांति प्रयासों पर आगे बढ़ें।

रूस और यूक्रेन के बीच जंग 37वें दिन भी जारी। यूक्रेन ने पलटवार करते हुए रूस के शहर पर हमला किया। रूस के पश्चिमी शहर बेलगोरोड के गवर्नर के मुताबिक- यूक्रेन के 2 हेलिकॉप्टरों ने उनके ऑयल डिपो पर एयरस्ट्राइक की, इस हमले में दो लोग घायल हुए।

यूक्रेन जंग के बीच नई दिल्ली पहुंचे रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भारत की तटस्थ विदेश नीति की तारीफ की है। रूसी विदेश मंत्री ने कहा कि रूस और यूक्रेन विवाद में भारत मध्यस्थता कर सकता है, क्योंकि भारत का रुख हमेशा से निष्पक्ष रहा है और यह कभी अमेरिकी दबाव में नहीं आया। लावरोव ने कहा कि भारत हमसे जो भी सामान खरीदना चाहता है, हम उसे देने के लिए तैयार हैं। जंग के 37वें दिन रूस ने दावा किया कि यूक्रेन के हेलिकॉप्टरों ने उसके पश्चिमी शहर बेलगोरोड में हमला किया है। इसमें तेल डिपो तबाह हो गया है। हमले में 2 लोग घायल हुए हैं।

पाकिस्तान में सियासी पारा चढ़ा हुआ है। इसी बीच पाक पीएम इमरान खान ने एक बार फिर भारत की तारीफ करते हुए कहा कि हिंदुस्तान हमारे साथ ही आजाद हुआ था, उनकी विदेश नीति की वजह से दुनिया में उसकी इज्जत है।

पाकिस्तान में सियासी संकट का सामना कर रहे इमरान खान पर उनकी पूर्व पत्नी रेहम खान ने फिर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि इमरान खान ने पाकिस्तान की उम्मीदों पर पानी फेर दिया।

पाकिस्तान के 75 साल के इतिहास में कोई भी प्रधानमंत्री अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाया है। और आजादी के 11 साल बाद ही वहां पर सैनिक शासन लागू हो गया था।

श्रीलंका में आर्थिक संकट गहराया। डीजल बचाने के लिए हो रही बिजली कटौती, देश भर में स्ट्रीट लाइट बंद करने का निर्देश। हजारों लोगों ने राष्ट्रपति गोटाभाया राजपक्षे के निवास के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान हुई हिंसा में कम से कम 10 लोग घायल हुए।

इमरान ख़ान खिलाड़ी तो बहुत अच्छे थे, लेकिन क्या वे माहिर राजनेता भी साबित हो पाएंगे? लेकिन सवाल ये उठता है कि हालात यहां तक पहुंचे कैसे? क्या इसके लिए उनकी ग़लतियां ज़िम्मेदार हैं? आख़िर उन्होंने कौन कौन सी ग़लतियां कीं? क्रिकेट में अपनी आक्रामक गेंदबाज़ी के लिए मशहूर रहे इमरान ख़ान ने राजनीति में भी अपनी यही बात बरक़रार रखी. पाकिस्तान की राजनीति में भाषा का प्रयोग पहले भी बहुत अच्छा नहीं रहा है, लेकिन इमरान ख़ान ने कुछ ऐसा अंदाज़ अपनाया कि उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी भी लोगों को विनम्र लगने लगे. नवाज़ शरीफ़ और आसिफ़ अली ज़रदारी के लिए 'चोर', 'डाकू' और मौलाना फ़ज़लुर रहमान को 'डीज़ल' कह कर, उन्होंने नेताओं को बुरे नामों से पुकारने की परंपरा स्थापित कर दी. हालांकि बात यहीं तक सीमित नहीं रही है. इमरान ख़ान ने हाल के राजनीतिक संकट के दौरान, अपनी ही पार्टी के नाराज़ सदस्यों पर हमलावर होकर अपने लिए बहुत बड़ी मुसीबत मोल ले ली. नेशनल असेंबली के इन नाराज़ सदस्यों में से लगभग एक दर्जन सदस्यों ने अचानक इस्लामाबाद के सिंध हाउस में टीवी एंकरों के सामने आकर अपनी पार्टी और ख़ासकर इमरान ख़ान की नीतियों की खुलेआम आलोचना की.इसके बाद उन सदस्यों का पहले तो प्रधानमंत्री ख़ान ने और फिर उनके मंत्रियों ने वो हाल किया, कि जैसे उन्हें उनकी वापसी की कोई उम्मीद ही नहीं थी. उनके बारे में कहा गया कि उनके बच्चे स्कूल नहीं जा सकेंगे, उनकी शादियां नहीं हो पाएगी, उन्होंने करोड़ों रुपये लेकर अपने ज़मीर बेच दिए आदि आदि. यदि कोई बेहद अनुभवी और समझदार नेता होते, तो शायद वो ऐसा करते. वो कहते कि ये तो हमारे अपने घर के लोग हैं और घर में भी मतभेद पैदा हो जाते हैं. हम उन्हें मना लेंगे. लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं कहा गया. वो भी उस प्रधानमंत्री ने ये सब किया, जिनके पास नेशनल असेंबली में साधारण बहुमत तक नहीं है. इससे उन दर्जन भर सदस्यों की नाराज़गी कम होने के बजाय और बढ़ गई. इमरान ख़ान ने अब उन्हें अविश्वास प्रस्ताव के सेशन में शामिल होने से रोक दिया है. यदि वे पार्टी के निर्देशों का उल्लंघन करते हुए वोटिंग में हिस्सा लेते हैं, तो उन पर फ़्लोर क्रॉसिंग विरोधी क़ानून के तहत कार्रवाई हो सकती है. हालांकि, विपक्ष को अब इन नाराज़ सदस्यों की शायद ही ज़रूरत पड़ेगी, क्योंकि एमक्यूएम के उनके साथ आने से नंबर-गेम में उनकी हालत मज़बूत हो गई है. इमरान ख़ान ने केवल नेताओं के लिए ही नहीं बल्कि महिलाओं के रेप के मामले में, ओसामा बिन लादेन को शहीद कहने में, और हज़ारा समुदाय को उन्हें ब्लैकमेल करने, जैसे बयानों में भी लापरवाह भाषा का इस्तेमाल किया. 'तटस्थ तो जानवर होते हैं', जैसे बयान भी उनके हक़ में नहीं गए. बाद में उन्हें इस पर अपनी सफ़ाई भी देनी पड़ी. साढ़े तीन साल के शासनकाल में वे उनकी मांगों पर कोई ख़ास तवज्जो नहीं दे पाए. किसी को पंजाब में इमरान ख़ान के चहेते मुख्यमंत्री उस्मान बज़दार पसंद नहीं थे, जबकि हूसरों को उनकी तवज्जो मिलने की शिकायत थी.

    भले ही परिस्थितियां देखकर फैसला करने का नाम राजनीति बन गया हो, लेकिन इमरान ख़ान ने राजनीति को नैतिक आधार पर चलाने की कोशिश की. नैतिक रूप से आप एक सच्ची और मज़बूत पोज़िशन ले सकते हैं अगर माहौल अनुकूल है तो. लेकिन संसद में अगर ज़्यादातर संख्या ऐसे सदस्यों की हो, जो कारोबार और अन्य उद्देश्यों के लिए संसद में आए हैं, तो नैतिकता की परवाह कौन करता है. संसद ज़्यादातर निजी स्वार्थ के लिए आने वाले लोगों का ठिकाना है, वहां हर मुद्दे पर लेन देन होता है. नैतिकता को ऊपर रखने की कोशिश में इमरान ख़ान आख़िरकार राजनीति में हार गए. ज़्यादातर पाकिस्तानियों का मानना है कि जिस नए पाकिस्तान का टारगेट लेकर वो आए थे, शायद वह इस पारी में संभव हो, लेकिन अगली बार वह सच हो जाएगा. इस बात का उन्हें बहुत बाद में एहसास हुआ और उन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री के अलावा सहयोगियों को और मंत्रालय बांटने शुरू किए, लेकिन तब तक पानी सिर से ऊपर जा चुका था. इमरान ख़ान विदेश नीति के साथ-साथ घरेलू राजनीति में नए रुझानों को पेश करने के प्रयास में उनके अनुसार "विदेशी साजिश" के शिकार हो गए. वह किसी का युद्ध में नहीं बल्कि शांति में साथ देने की नीति लेकर आये. शीत युद्ध के बाद से पाकिस्तान हर युद्ध में पश्चिम का साथ देता रहा है. अफ़ग़ानिस्तान में तो पाकिस्तान चार दशकों तक अमेरिका का सैन्य सहयोगी बना रहा है. यहां तक कि जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ जैसे शक्तिशाली सैन्य तानाशाह भी एक अमेरिकी कॉल पर मदद देने के लिए तैयार हो जाते थे.

 

अफ़ग़ानिस्तान से सैनिकों की वापसी के बाद, अमेरिकी कॉल आना बंद हो गए, जिस पर पाकिस्तान को शर्मिंदा नहीं होना चाहिए था, लेकिन सरकारी अधिकारियों के बयानों ने इस शिकायत को कम करने के बजाय इसे बढ़ा दिया. इमरान ख़ान इस्लामिक देशों को भी एकजुट करने की कोशिश कर रहे थे. पहले तो उन्होंने तुर्की और मलेशिया के साथ एक गुट बनाने की कोशिश की, जिसे ज़ाहिरी तौर पर सऊदी अरब की नाराज़गी के कारण रोक दिया गया था. बाद में, अफ़ग़ानिस्तान और पिछले दिनों इस्लामिक देशों के संगठन (ओआईसी) की लगातार दो बैठकें इस्लामाबाद में आयोजित की गईं. रूस की यात्रा को लेकर पश्चिमी देश उनसे साफ़ तौर पर नाराज़ हैं. इन देशों के इस्लामाबाद में मौजूद राजदूतों ने सरकार को एक संयुक्त पत्र भी लिखा है, जिसमें यूक्रेन पर हमले की निंदा करने की मांग की गई है. इमरान ख़ान निंदा तो क्या करते हमले के पहले दिन मास्को पहुंचे. इसलिए रिएक्शन तो आना ही था. कुछ हलकों के अनुसार, चीन की मदद से चल रही सी-पैक कॉरिडोर परियोजना पर, 2018 में उनके सत्ता में आने से पहले और बाद में कुछ समय तक उनके विरोध की वजह से बीजिंग कुछ ज़्यादा ख़ुश नहीं है. चीन के सरकारी हलकों में शाहबाज़ शरीफ़ को ज़्यादा लोकप्रिय बताया जाता है.

2018 में सरकार बनने के बाद से, इमरान ख़ान के लिए सबसे बड़ी चुनौती राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में सुधार लाना था. 22 साल से राजनीति के क्षेत्र में संघर्ष कर रहे इमरान ख़ान ज़ाहिरी तौर पर सरकार चलाने के लिए तैयारी करके नहीं आये थे. असद उमर को वित्त मंत्री नियुक्त किया गया था, लेकिन अप्रैल 2019 में आईएमएफ़ को समय पर बेलआउट पैकेज देने में विफल रहने के आरोप में उन्हें बदल दिया गया.  उनकी जगह अब्दुल हफ़ीज़ शेख़ को लाया गया और फिर जल्द ही उन्हें भी हटा दिया गया और संघीय उद्योग और उत्पादन मंत्री हम्माद अज़हर को वित्त मंत्रालय भी सौंप दिया गया. हम्माद अज़हर पीटीआई सरकार के तीसरे वित्त मंत्री थे. इसके बाद मौजूदा वित्त मंत्री शौक़त तरेन को लाया गया, जो नवाज़ शरीफ़ और मुशर्रफ़ सरकारों का भी हिस्सा थे. बार-बार कैबिनेट में फेरबदल होने से इस धारणा को मज़बूती मिली कि सरकार की टीम में परिणाम देने की क्षमता नहीं है.

फिर राजनेताओं की जवाबदेही के लिए, तीन साल बहुत ही ख़राब साबित हुए. लगभग सभी प्रमुख विपक्षी नेताओं को गिरफ़्तार किया गया, कई महीनों तक हिरासत में रखा गया, मुक़दमे किये गए, लेकिन सबूतों के अभाव में सभी को एक-एक करके रिहा कर दिया गया. जवाबदेही का नारा महज एक नारा बन कर रह गया. हिसाब लेने के लिए चुने गए शहज़ाद अकबर भी लंबी लंबी प्रेस कॉन्फ्रेंस और अरबों ख़रबों के घोटाले जनता को याद कराने के तीन साल बाद, कुछ भी हाथ लगने पर ख़ामोश हो कर बैठ गए. इमरान ख़ान के प्रयासों और इरादों पर शायद किसी को भी शक हो, लेकिन अपनी पहली पारी में वह अपनी टीम की वजह से काफ़ी पिटें हैं. अब यह देखना बाक़ी है कि क्या उन्हें दूसरा मौक़ा मिलता है या नहीं, और अगर मिलता है तो वे कौन सी टीम को कितनी तैयारी के साथ लेकर मैदान में उतारते हैं.

नए वित्त वर्ष के पहले ही दिन महंगाई का झटका लगा है। 19 किलो वाणिज्यिक रसोई गैस एलपीजी की कीमत में 250 रुपये प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी की गई। आज से इसकी कीमत 2253 रुपये होगी। राहत वाली बात ये है कि घरेलू गैस सिलेंडर के दामों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। कॉमर्शियल सिलेंडर के दाम बढ़ने से रेस्टोरेंट में खाना खाना और महंगा हो जाएगा।

वित्त वर्ष 2021-22 के आखिरी महीने मार्च में जीएसटी कलेक्शन 1.42 लाख करोड़ को पार कर गया। यह किसी महीने में GST का अब तक का सबसे ज्यादा कलेक्शन है। पिछले साल इसी महीने की तुलना में यह 15% बढ़ा है। इससे पहले रेकॉर्ड कलेक्शन इसी साल जनवरी में बना, जब 1.40 लाख करोड़ का कलेक्शन हुआ था।

उत्तर प्रदेश के कानपुर में अपने घर पर बीजेपी का झंडा लगाने की वजह से एक मुस्लिम युवक को उसके पड़ोसियों ने जमकर पीटा। इससे पहले बदायूं में भी एक मुस्लिम युवक को जान से मारने की खबर मिली थी। कुशीनगर में बीजेपी की जीत पर मिठाई बांटने वाले बाबर की हत्या कर दी गई. उन्होंने युवक को दोबारा ऐसा करने पर जान से मारने की धमकी दी. पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) समर्थक बाबर अली की हत्या का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा कि कानपुर में भी ऐसा मामला सामने आने लगा है। यहां पर एक पढ़े-लिखे मुस्लिम युवक को बीजेपी का झंडा लगाने पर पड़ोसियों ने आंख फोड़कर गर्दन काटने की धमकी ही नहीं दी बल्कि कई बार उसके साथ सरेआम मारपीट भी की। आखिर अपनी जान का संकट जानकार उसने थाने में एफआईआर लिखवा दी है। पुलिस मामले की जांच तो कर रही है लेकिन किसी आरोपी को अभी तक गिरफ्तार नहीं किया है। मामला कानपुर के किदवई नगर की जूही लाल कॉलोनी में रहने वाले शकील अहमद से जुड़ा हुआ है। शकील पहले दिल्ली में एक मल्टी नेशनल कंपनी में काम करते थे। इसके बाद शकील कानपुर अपने घर आकर ज्वैलरी का बिजनेस करने लगे। शकील का कहना है कि मै 2013 से बीजेपी का समर्थक हूं, मोदी को पसंद करता हूं, इस बार विधानसभा चुनाव में मैंने अपने घर पर बीजेपी का झंडा लगाया जबकि बाकी पूरे मोहल्ले ने कांग्रेस का झंडा लगाया था। उनका कहना है कि बीजेपी विधायक ने चुनाव के दौरान मेरे गले में माला डाल दी थी।शकील का कहना है कि इससे मेरे पड़ोसी नाराज हो गए और सभी ने मेरे घर से बीजेपी का झंडा नोचकर फेंक दिया, लेकिन मैंने फिर झंडा लगा दिया, इससे नाराज होकर पड़ोसी शाहनवाज ने मुझे धमकी दी कि मोहल्ले के मुस्लिमों के साथ मिलकर चलो नहीं तो तुम्हारी आंखे फोड़कर गर्दन काट दूंगा। इसके बाद इन लोगों ने मुझे कई बार मारा पीटा। शकील ने कहा कि अब मुझे अपनी जान का खतरा लग रहा है इसलिए किदवई नगर थाने में एफआईआर लिखवा दी है। पुलिस ने शकील की शिकायत पर शाहनवाज, राशिद, रिजवान और भल्लू के साथ ही उसके लड़के के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। पुलिस ने धारा 147, 427, 323, 506 और 294 में एफआईआर लिखी है। एडीसीपी मनीष सोनकर का कहना है कि शकील की तरफ से एफआईआर लिखी गई है, उन्होंने 29 तारीख को मारपीट करने का आरोप लगाया है, उन्होंने एफआईआर में राजनैतिक विरोध के आरोप लगाए हैं, पुलिस जांच करके कार्यवाही कर रही है।

दूसरी बार यूपी की कमान संभालने के बाद सीएम योगी आज पहली बार अयोध्या पहुंचे हैं। रामलला के दर्शन के बाद अयोध्या मंडल की बैठक में समीक्षा करेंगे। अपने पहले कार्यकाल के दौरान सीएम योगी करीब 46 बार अयोध्या पहुंचे थे।

सत्ता संभालने के बाद एक्शन में उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ। सोनभद्र के डीएम और गाजियाबाद के एसएसपी को सस्पेंड किया। जिलाधिकारी सोनभद्र टीके शिबू को खनन और निर्माण कार्य में भ्रष्टाचार के कारण निलंबित कर दिया गया है। जबकि गाजियाबाद के एसएसपी पर ड्यूटी का पालन नहीं करने के चलते एक्शन लिया गया है।

आईजीएल ने गौतम बुद्ध नगर और गाजियाबाद में घरेलू पीएनजी की कीमत में 5.85 प्रति SCM का इजाफा किया है।

राजस्थान के दौसा में महिला डॉक्टर की मौत के बाद मामला गरमा गया है. पुलिस ने इस इस सिलसिले में बीजेपी के एक नेता को गिरफ़्तार किया है.

पंजाब विधानसभा में आज (शुक्रवार, 1 अप्रैल) एक अहम प्रस्ताव पारित किया गया, जिसमें केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ को तत्काल पंजाब को हस्तांतरित करने की मांग की गई। विधानसभा में प्रस्ताव पारित, BJP को छोड़ सभी ने किया समर्थन.

रीवा के सर्किट हाउस में नाबालिक के साथ रेप की घटना को अंजाम देने वाले कथावाचक सीताराम की मुश्किलें बढ़ती जा रही है। कोर्ट ने आरोपी को 2 दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा है। इसके साथ ही सीएम शिवराज सिंह चौहान के सख्त रूख के बाद रीवा प्रशासन ने आरोपी के मकान को बुलडोजर चलाकर जमींदोज कर दिया। आरोपी को पैदल ही कोर्ट में पेशी के लिए ले जाया गया।

गोवा के बिट्स पिलानी इंजीनियरिंग कैंपस में कोरोना के 24 नए मामले सामने आए हैं। संक्रमित होने वाले सभी छात्र हैं। अधिकारियों ने बताया कि कॉलेज को बंद करा दिया गया है। अभी ऑनलाइन पढ़ाई होगी। बाकी बचे लोगों की जांच भी हो रही है। कैंपस में किसी को आने की इजाजत नहीं है।

शैक्षणिक सत्र 2022-23 के लिए केंद्रीय विश्वविद्यालयों में नामांकन की प्रक्रिया आज से शुरू हो जाएगी। इसके लिए कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (सीयूईटी) देना होगा। टेस्ट में शामिल होने के लिए रजिस्ट्रेशन आज से शुरू हो जाएंगे। cuet.samarth.ac.in पर जाकर रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं।

पिछले 24 घंटों के दौरान, असम, मेघालय अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हुई और कुछ स्थानों पर भारी बारिश हुई। शेष पूर्वोत्तर भारत और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल में हल्की से मध्यम बारिश हुई। केरल और आंतरिक तमिलनाडु की पहाड़ियों पर छिटपुट हल्की बारिश हुई। हिमाचल प्रदेश, दक्षिण हरियाणा और दिल्ली के कुछ हिस्सों में लू से लेकर गंभीर लू की स्थिति देखी गई। पूर्वी मध्य प्रदेश के अधिकांश हिस्सों, राजस्थान के कई हिस्सों, पश्चिमी मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों और दक्षिण उत्तर प्रदेश, मध्य महाराष्ट्र और विदर्भ में एक या दो स्थानों पर लू की स्थिति बनी। अगले 24 घंटों के दौरान, असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में हल्की और मध्यम बारिश के साथ कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, शेष पूर्वोत्तर भारत, दक्षिण तटीय कर्नाटक और लक्षद्वीप और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश संभव है। पूर्वोत्तर बिहार और आंतरिक तमिलनाडु में छिटपुट हल्की बारिश हो सकती है। 1 से 3 अप्रैल के बीच राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और एनसीआर और हरियाणा के कुछ हिस्सों में गर्मी की लहर की तीव्रता कम हो जाएगी।



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